एक कमी थी | अधूरे प्रेम और स्मृतियों की हिंदी कविता

एक कमी थी | अधूरे प्रेम और स्मृतियों की हिंदी कविता There-was-a-shortcoming-which-you-were-not-potry-hindi-in

जीवन में कभी-कभी सब कुछ होते हुए भी एक ऐसी कमी रह जाती है, जिसे कोई वस्तु, कोई उपलब्धि या कोई भीड़ भर नहीं सकती। वह कमी किसी अपने की होती है, जिसकी उपस्थिति जीवन को पूर्णता देती है। प्रस्तुत कविता उसी रिक्तता और स्मृतियों के सहारे जीते प्रेम की अभिव्यक्ति है।

एक कमी थी

एक कमी थी—

जो तुम नहीं थीं।

नदियाँ थीं,

पर्वत थे,

झीलें थीं,

सागर था,

फूल थे,

पत्तियाँ थीं,

प्रकृति का

हर रंग मौजूद था,

फिर भी

मन के भीतर

कुछ रिक्तताएँ थीं।

एक कमी थी—

जो तुम नहीं थीं।

अनंत विश्राम भी

मेरी पीड़ा को

शांत न कर सका।

चिड़ियों का कलरव,

उनकी चंचल क्रीड़ा,

सब कुछ था,

पर मेरे भीतर

एक अजीब-सी

नीरवता पसरी थी।

हर अंगड़ाई में

तुम्हारी कमी

साथ चलती थी।

जीवन-पथ पर

चल तो रहा था,

पर भीतर से

थक चुका था।

मेरा अंतर्मन

तुम्हें पुकारता रहा।

मेरी नज़रें

हर दिशा में

तुम्हें खोजती रहीं।

हर दौड़,

हर होड़,

तुम्हारे बिना

अधूरी लगती रही।

एक कमी थी—

जो तुम नहीं थीं।

बार-बार

उम्मीद लौट आती,

पर प्यास

वैसी ही रहती।

मेरी आँखें

अनायास भीग जातीं,

और एक गहरी आह के साथ

करुणा

मन में उतर आती।

एक कमी थी—

जो तुम नहीं थीं।

उस कमी की

पूर्ति

कभी हो न सकी,

पर तुम्हारी स्मृतियाँ

मेरे साथ रहीं।

मेरे मन के आँगन में

तुम्हारी उपस्थिति

आज भी

वैसी ही जीवित है,

जैसे

कभी गई ही न हो।

इसलिए,

तुम्हारी अनुपस्थिति में भी

तुम्हारी स्मृति

मेरे जीवन की

सबसे बड़ी उपस्थिति बनी रही।

और अंत में कविता 

सच्चा प्रेम केवल साथ रहने से नहीं, स्मृतियों में जीवित रहने से भी पहचाना जाता है। कुछ लोग जीवन से दूर हो जाते हैं, लेकिन हृदय से कभी नहीं जाते। उनकी यादें ही हमारे भीतर उनकी स्थायी उपस्थिति बन जाती हैं।

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