दुनियादारी नहीं आती | ईमानदारी, स्वाभिमान और प्रेम की वेदना पर हिंदी कविता
दुनिया में सफलता के कई रास्ते बताए जाते हैं, पर हर रास्ता सम्मान की ओर नहीं ले जाता। कुछ लोग चालाकी से आगे बढ़ते हैं, तो कुछ सत्य और ईमानदारी को अपना मार्ग बनाते हैं। वहीं प्रेम भी केवल सुख नहीं देता; वह संवेदना, प्रतीक्षा और वेदना का भी अनुभव कराता है। प्रस्तुत कविता इन्हीं दो पक्षों—चरित्र और प्रेम—का आत्मीय चित्रण है।
दुनियादारी नहीं आती
दुनियादारी नहीं आती,
चालाकी नहीं आती।
दिल तोड़कर मुस्कुराना,
ऐसी समझदारी नहीं आती।
उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे,
ऐसी दादागीरी नहीं आती।
वे रिश्ते मतलब से निभाते हैं,
ऐसी राजनीति नहीं आती।
झूठे दावों पर उन्हें भरोसा है,
मुझे ऐसी वफ़ादारी नहीं आती।
धोखेबाज़ों को भी यहाँ
कई बार प्यार मिल जाता है,
लेकिन सच्चे लोगों को
हर किसी से दोस्ती निभानी नहीं आती।
न जाने कैसे लोग
बार-बार गिरकर भी
अपनी भूलों से नहीं सीखते,
शायद इसलिए
उन्हें खुद्दारी नहीं आती।
जिसकी नीयत ही डाँवाडोल हो,
उसे ईमानदारी कहाँ आती है?
प्रेम की वेदना
प्यार करना है
प्यार करना है,
तो वेदना से भी भरना है।
हृदय को,
मन को,
उन अनकहे एहसासों से,
जो शब्दों में
पूरे उतर नहीं पाते।
प्रेम केवल पाने की चाह नहीं,
किसी के सुख में
अपना सुख ढूँढ़ लेना भी है।
कभी प्रतीक्षा,
कभी कसक,
कभी स्मृतियों की धीमी आँच—
यही प्रेम का दूसरा रूप है।
जिसने प्रेम किया है,
वह जानता है
कि प्रेम केवल मुस्कान नहीं,
एक मधुर पीड़ा भी है,
जो मन को जलाती नहीं,
पर भीतर से
और अधिक संवेदनशील बना देती है।
प्रेम करना है,
तो इस चुभन को भी
अपनाना होगा।
और अंत में कविता
ईमानदारी और प्रेम दोनों आसान मार्ग नहीं हैं। एक में समझौते का प्रलोभन है, दूसरे में वेदना का अनुभव। फिर भी यही दोनों मनुष्य को भीतर से समृद्ध और मानवीय बनाते हैं।
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