कह लेता हूँ मैं | प्रेम, विश्वास और दिल की बात पर भावपूर्ण हिंदी कविता I just laugh love-poetry-in-Hindi
मनुष्य हर बात सबके सामने नहीं कह पाता। कुछ भाव ऐसे होते हैं, जो केवल उसी व्यक्ति के सामने सहज होकर बाहर आते हैं, जिस पर सबसे अधिक विश्वास हो। प्रेम का सबसे बड़ा सौंदर्य यही है कि उसके सामने मनुष्य अपने आँसू भी नहीं छिपाता और अपनी मुस्कान भी। यह कविता उसी सहज आत्मीयता और भरोसे की अभिव्यक्ति है।
प्रेम और विश्वास पर हिंदी कविता
कह लेता हूँ मैं
बस हँस लेता हूँ मैं,
जब भी मन करता है,
दिल की बात
कह लेता हूँ मैं।
मेरा अधिकार-सा है तू,
मेरा प्यार-सा है तू।
तेरे सामने
मैं बनावटी नहीं रहता,
जी भरकर रो भी लेता हूँ,
और मुस्कुरा भी लेता हूँ।
मेरी मोहब्बत के सहारे,
अपनी चाहत के भरोसे,
कभी गुस्ताखियाँ कर लेता हूँ,
कभी शिकायतें भी कर लेता हूँ,
क्योंकि
तुझसे कुछ भी छिपाना
सीखा नहीं मैंने।
जब दर्द
सहना मुश्किल हो जाए,
और दिल
खामोश न रह पाए,
तब सबसे पहले
तुझे ही ढूँढ़ता हूँ।
तेरे सामने
अपना हाल-ए-दिल
बिना किसी डर के
कह देता हूँ।
एक तू ही तो है,
जिसके होने से
सब कुछ अपना लगता है।
तू साथ हो,
तो दुनिया भी
सुंदर लगती है;
तू दूर हो,
तो भीड़ में भी
तन्हाई साथ चलती है।
तुझे देखकर
जीने की वजह मिल जाती है,
तुझे पाकर
मन को सुकून मिलता है।
यही सोचकर
हर दिन
अपने दिल को समझा लेता हूँ,
और जी लेता हूँ !!!!!
बस हंस लेता हूं मैं
लोगों की चालाकियों से
जब बच जाता हूं मैं
पग-पग धोखा देने लोग खड़े हैं
जैसे मेरे नुकसान से फायदा धरे हैं !!!!
और अंत में कविता
सच्चा प्रेम वही है, जहाँ मनुष्य बिना किसी भय या दिखावे के स्वयं बन सके। और जीवन की सबसे बड़ी समझ यह है कि दुनिया की चालाकियों के बीच भी अपना विश्वास, संवेदनशीलता और मुस्कान बचाए रखी जाए। जो व्यक्ति अपने प्रिय के सामने दिल खोलकर जी सकता है और संसार के छल के बीच भी अपनी सरलता नहीं खोता, वही वास्तव में जीवन का सौंदर्य समझ पाता है।
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