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 जान कर अंजान मत बनो

इतना होशियार मत बनो

तेरी जुबां पे झूठ का आवरण है

इस सच से अंजान मत बनो

जाहिर हो गई है तेरी चालाकियां

मीठी-मीठी बातों से शरीफ़ मत बनो

आखिर एक दिन मरना है सबको

इतना अभिमानी मत बनो

ये धन दौलत बेकार की चीज है

इसके पीछे भागने वाले मत बनो

तेरी परछाई साथ है चलते हैं सदा

अपने अस्तित्व से अंजान मत बनो !!!

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कितनी दिखावा है

दिखावा ही छलावा है 

लोग आधुनिक है

अपनी चालाकी से

ओछा है एक धोखा है

जिसे आजकल के शिक्षितों का

बढ़ावा है !!!


चुरा लिया है कुछ अंश

महापुरूषों का

दिखाने के लिए

सीख लिया है

कुछ ज्ञान

उसकी वाणी से

कहते हैं

लेकिन क्या समझते हैं

तुरंत फारवर्ड कर देते हैं

दूसरों के लिए

सोचों कितनी सियासत

कितना फरेब !!!!

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