तुम्हारा स्पर्श | प्रेम, एहसास और संवेदना पर भावपूर्ण हिंदी कविता
प्रेम में स्पर्श केवल शरीर का नहीं, बल्कि आत्मा और भावनाओं का भी होता है। एक सच्चा स्पर्श मन को सुकून देता है, जबकि असंवेदनशील स्पर्श रिश्तों में दूरी भी पैदा कर सकता है। यह कविता स्पर्श के इन्हीं दो पहलुओं को अभिव्यक्त करती है।
तुम्हारा स्पर्श कविता
तुम्हारा स्पर्श पाते ही
महक उठता है बदन
तुम्हारे स्पर्श में वो ताजगी है
खिल उठता है पूरा बदन
और जिस्म की चमक छुपती नहीं
और लोग जान जाते हैं मेरे नयन
दिन गुजर जाता है इसी खुशी में
अपना सा लगता है ये नजारे ये चमन
तुम्हारा स्पर्श पाकर !! !
तुम्हारा स्पर्श
जिससे होता है
तुम्हें याद रहता है
अच्छा/ बुरा
लेकिन तुमने अक्सर
बुरा स्पर्श किया
जिससे तुम्हें प्रेम था
उसे ही नहीं पाएं !!!
तुमने स्पर्श करने की कोशिश की
लेकिन महसूस हुआ बुरा
उम्मीद के विपरित
तुम्हें मिला
अपने प्रेम में
जिसके स्पर्श को
तुम भूल नहीं पाए !!!!
और अंत में कविता
प्रेम का स्पर्श केवल निकटता का अनुभव नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और अपनत्व का प्रतीक होता है। जब स्पर्श में संवेदना हो, तो वह जीवनभर याद रहता है; और जब उसमें संवेदना न हो, तो वही स्पर्श एक अधूरी स्मृति बन जाता है।
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