जीने की दुआ | प्रेम, समर्पण और अस्वीकृति पर हिंदी कविता jeene ki dua prem-kavita
प्रेम केवल किसी को पा लेने का नाम नहीं है, बल्कि उसके सुख की कामना, उसके सम्मान की रक्षा और उसके निर्णय को स्वीकार करने की क्षमता भी है। सच्चा प्रेम मनुष्य को भीतर से कोमल बनाता है, उसे साहस देता है और जीवन के कठिन क्षणों में आशा का आधार बनता है।
किन्तु प्रेम का दूसरा पक्ष भी उतना ही गहरा है—अस्वीकृति। जहाँ एक ओर कोई अपने प्रेम का इज़हार करता है, वहीं दूसरी ओर किसी को उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार भी होता है। इस प्रक्रिया में दोनों पक्ष भावनात्मक अनुभवों से गुजरते हैं; एक आशा और प्रतीक्षा से, तो दूसरा निर्णय और संवेदना के द्वंद्व से।
प्रस्तुत कविता प्रेम की इसी दोहरी अनुभूति को अभिव्यक्त करती है। पहले भाग में प्रेम, विश्वास और समर्पण की प्रार्थना है, जबकि दूसरे भाग में प्रेम-प्रस्ताव, अस्वीकृति और मानवीय संवेदनाओं का शांत, आत्मविश्लेषी चित्रण है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि प्रेम का वास्तविक सौंदर्य अधिकार में नहीं, बल्कि सम्मान, करुणा और स्वीकार में निहित है।
जीने की दुआ कविता
जीने की दुआ दे हमें
प्यार का आसरा दे हमें
लड़ जाऊॅं मैं दुनिया से
ऐसा हौसला दे हमें
ये जिंदगी है दो दिन की
बस प्यार ही प्यार दे हमें
छोड़ दी दुनिया तेरे लिए
सिर्फ तेरा आसरा दे हमें
कम है जुगनुओं की रौशनी
अब ये चॉंद-सितारा दे हमें !!!
अस्वीकृति पर कविता
कितना आसान होता है
किसी सुन्दर स्त्री से
प्रेम का प्रगट करना
प्रस्ताव कई बार गिरने के बाद भी
पुनः लाया जाता है
चक्कर काटते सम्भावित वर
कई स्त्रियों को
अस्वीकार कर चुके होते हैं
कितना कठिन होता होगा
उस स्त्री के लिए
किसी का नापसंद होना
बार-बार
अपमानित होते हैं
अनचाहे चेहरे के रंग से !!!!!
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