प्रेम की पीड़ा | प्रेम और विरह पर हिंदी कविताएँ
प्रेम केवल आनंद का अनुभव नहीं, बल्कि संवेदना, समर्पण और पीड़ा को साझा करने की क्षमता भी है। प्रस्तुत कविताएँ प्रेम की उसी यात्रा को व्यक्त करती हैं—जहाँ चाहत है, विरह है, समझे जाने की आकांक्षा है और फिर भी प्रेम का विश्वास बना रहता है।
प्रेम पर हिंदी कविता
मेरा दिल नादान है
जिसकी तू पहचान है
तुम्हारा साथ मिल जाए
तो सफ़र आसान है
जिंदगी चलती रहे साथ- साथ
बस इस दिल का यही अरमान है
कौन सुने दिल की बात
प्रेम करने वालों का भगवान है
तुम चलो साथ- साथ
जिंदगी का सफ़र आसान है !!!
प्रेम की पीड़ा
समझ पाए
तो प्रेम कर पाए
पीड़ा ही जोड़ता है
दो दिलों को
दो जिस्मों को
एक को चोट लगे
दुजे को महसूस हो
जब प्रेम में पीड़ा हो
वहीं प्रेम अपना घर बनाता है
जहाँ दर्द साझा हो !!!
हम तो उसे चाहने लगे
जो हमें समझ नहीं पाए
आखिर उसे टूटकर छूट जाना
उसे ही सजाने लगे
हम तो उसे चाहने लगे
उसके दिल की परख है मुझे
न चाहे न माने मुझे
है बुरा वो
दिल की कोने से
कोई मुझे समझाने लगे !!!!
और अंत में कविता
सच्चा प्रेम अधिकार नहीं माँगता, बल्कि समझ और संवेदना चाहता है। जब दो हृदय एक-दूसरे के सुख-दुःख को अपना मान लेते हैं, तभी प्रेम अपने पूर्ण रूप में प्रकट होता है। चाहे प्रेम पूर्ण हो या अधूरा, वह मनुष्य को भीतर से अधिक संवेदनशील और परिपक्व बना देता है।
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-राजकपूर राजपूत
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