एक स्त्री की दृष्टि से | सौंदर्य, सम्मान और स्त्री-अस्तित्व पर विचारोत्तेजक हिंदी कविता poem on woman
भले ही आजकल सभ्य समाज में एक स्त्री को सम्मान देने की बातें करते हो । लेकिन उसका स्थान क्या है ? उसकी प्रस्तुतिकरण में दिखाई देता है । छोटे कपड़े पहनने के लिए प्रेरित करना । कलाकार के रूप में शारीरिक स्पर्श करने के लिए प्रेरित करना । आजकल का ढोंग है । जो प्रगतिशील होने का दावा करता है । जिसकी दृष्टि अंत्यंत निंदनीय है । स्त्री केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि संवेदनाओं, विचारों और आत्मसम्मान का भी संसार है। जब किसी स्त्री को उसके व्यक्तित्व के बजाय केवल उसके रूप से आँका जाता है, तब उसके भीतर अनेक प्रश्न जन्म लेते हैं। यह कविता एक स्त्री की उसी मौन अनुभूति और आत्मसम्मान की आवाज़ है।
एक स्त्री की दृष्टि से कविता
एक स्त्री की दृष्टि से
तुम्हारी बातें
कभी-कभी
मुझे अजीब-सी लगती हैं।
जब तुम कहते हो—
"तुम बहुत खूबसूरत हो।"
और फिर
तुम्हारी नज़रें
मुझ पर ठहर जाती हैं,
एकटक...
अनवरत...
तब मैं सोचने लगती हूँ—
क्या तुमने
मेरा व्यक्तित्व देखा है,
या केवल
मेरा रूप?
यही प्रश्न
मन में एक डर जगा देता है।
तुमने
मेरी खूबसूरती देखी,
या मुझे?
यदि प्रेम
सिर्फ़ शरीर तक सीमित हो,
तो वह आकर्षण हो सकता है;
पर सम्मान नहीं।
स्पर्श का अर्थ
सिर्फ़ निकट आना नहीं,
बल्कि विश्वास,
गरिमा और सहमति को
महसूस करना भी है।
किसी रिश्ते की नींव
केवल शरीर पर नहीं,
आत्मीयता पर टिकती है।
तुम्हारा सम्मान
तब दिखाई देता है,
जब किसी स्त्री के लिए
तुम्हारे शब्द
सम्मान से भरे हों।
क्योंकि शब्द ही बताते हैं
कि मन में
स्त्री के लिए
वास्तविक स्थान क्या है।
केवल मंचों पर
स्त्री-सम्मान की बातें करना,
या एक दिन
उत्सव मना लेना पर्याप्त नहीं।
सम्मान तो
रोज़मर्रा के व्यवहार में,
बोलचाल में,
दृष्टि में
और विचारों में दिखाई देता है।
कला हो,
सिनेमा हो,
विज्ञापन हो
या समाज—
यदि स्त्री को
केवल आकर्षण का माध्यम बना दिया जाए,
तो प्रश्न उठना स्वाभाविक है—
उसकी प्रतिभा का स्थान कहाँ है?
उसके व्यक्तित्व का सम्मान कहाँ है?
मैं चाहती हूँ
तुम मुझे देखो—
मेरे विचारों में,
मेरी संवेदनाओं में,
मेरे संघर्षों में,
मेरे अस्तित्व में।
क्योंकि
जब तुम मुझे
मेरे सम्पूर्ण व्यक्तित्व के साथ स्वीकार करोगे,
तभी
तुम सचमुच
मेरा सम्मान करोगे।
और अंत में कविता
किसी भी समाज की परिपक्वता इस बात से नहीं मापी जाती कि वह स्त्री के सौंदर्य की कितनी प्रशंसा करता है, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि वह उसके व्यक्तित्व, उसकी स्वतंत्रता और उसकी गरिमा का कितना सम्मान करता है। जहाँ सम्मान होता है, वहीं समानता और सच्चे संबंधों की शुरुआत होती है।
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