आज रिश्तों से डर लगता है

दुनिया तरक्की बहुत कर ली है ।Ghazal_fear of corona period poem in hindi  शिक्षा दीक्षा भी बढ़ गई है । लेकिन उनके इरादे और नीयत साफ नहीं हुई है । जिसके कारण आज भी वैश्विक स्तर पर नफ़रत है । प्रतिस्पर्धा एक दूसरे से आगे बढ़ने की है । जिसमें अपनी समझ का स्तर गिरा चुका है । जिसके कारण पूरी मानवता ख़तरे में आ गई है । ऐसी एक बीमारी है करोना जो आधुनिक वैज्ञानिकों की देन है । पढ़िए इसके कारण से निर्मित स्थिति को कविता के रूप में 👇👇

Ghazal_fear of corona period poem in hindi 

 आज रिश्तों से डर लगता है

करोना का कहर लगता है


बचाओ खुद को अपनों को

जिसके दिलों में प्यार लगता है


अजीब हालात हो गई दुनिया की

क्या गांव और क्या शहर लगता है


मेरी दूरी को गलत मत समझना

बस करोना का मुझे डर लगता है


न घूमें इधर उधर यूॅं ही बेवजह

पुलिस का जुर्माना हजार लगता है


यक़ीनन बुरे वक्त गुजर जाएगा

बेशक कठिन दौर जरूर लगता है

मजबूरी में घर से निकलना भी मुश्किल है

हर अनजान शख्स से डर लगता है

जो बने थे अब तक भगवान

उस अस्पताल से भी डर लगता है  !!!


रिश्तों से डर लगता है

इतने डरते हैं

नए रिश्ते नहीं बनाते हैं

बनाते हैं

सम्भल कर चलते हैं

क्या पता

कौन सा रिश्ता

मतलब निकाल लें !!!


राजकपूर राजपूत "राज"

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Ghazal_fear of corona period poem in hindi



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