तुम्हें सौंपता हूँ — समर्पण और प्रेम की भावुक हिंदी कविता Tumhe-Saupta-hoon-Hindi-Poem

तुम्हें सौंपता हूं - कविता -

कभी-कभी दिल अपनी हर खुशी, हर जीत और हर अहसास किसी खास व्यक्ति को समर्पित कर देना चाहता है। समर्पण अपने अस्कतित्व का कर देना चाहता है । जिसके सहारे जिया जा जिंदगी को उसके सिवा कोई दूसरा विकल्प न हो । कविता उसी गहरे समर्पण, विश्वास और अधूरी मोहब्बत की कहानी कहती है।

कविता


मैं अपनी जीत तुम्हें सौंपता

अपना पुरुषार्थ तुम्हें सौंपता

तुम रहते साथ यदि तो,

अपना जीवन तुम्हें सौंपता।


मेरे भटकाव में तलाश है,

जिसका मुझे अहसास है।

वैसे मैं कभी थका नहीं,

मेरे इर्द-गिर्द तुम हो,

इसलिए मेरे भीतर उल्लास है।

लेता हूँ सुकून तुमसे,

अपनी रात, अपना दिन तुम्हें सौंपता—

मैं अपनी जीत तुम्हें सौंपता।


मैं हार जाऊँ, 

इस बात का ग़म नहीं,

तू अगर साथ है, 

मेरे लिए कम नहीं।

बेशक लोग पत्थरदिल हैं,

आँखों में नफ़रत है, मगर नम नहीं।

ऐसे ज़माने से दिन-रात लड़ता,

मैं अपनी जीत तुम्हें सौंपता।


तुम साथ न आए, कोई बात नहीं,

समझे न मेरे कोई जज़्बात—नहीं।

क्या उम्मीद लगाए बैठा था मगर,

अब कोई उम्मीद की बात नहीं।

छूटता साथ मगर, कोई यूँ नहीं छोड़ता,

चलते साथ तो अपना जीवन तुम्हें सौंपता—

मैं अपनी जीत तुम्हें सौंपता।


समर्पण की भावना इस कविता में 


सच्चे प्रेम और पूर्ण समर्पण को दर्शाती है, जहाँ व्यक्ति अपनी हर उपलब्धि और संघर्ष किसी प्रिय के नाम कर देना चाहता है।


भटकाव में भी तलाश


जीवन के कठिन रास्तों में भी एक खास व्यक्ति की मौजूदगी हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।


अधूरी मोहब्बत का सच


हर प्रेम कहानी पूरी नहीं होती, लेकिन अधूरी कहानियाँ ही अक्सर दिल में सबसे गहरी छाप छोड़ती हैं।

“तुम्हें सौंपता हूँ” सिर्फ एक कविता नहीं, बल्कि भावनाओं का सागर है—जहाँ प्रेम, त्याग और सच्चाई एक साथ बहते हैं।

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