मैं सरल हूँ | सादगी, प्रेम और मानवीय स्वभाव पर हिंदी कविता i-simple-am-poetry-love-ki
सरल होना कमजोरी नहीं, बल्कि चरित्र की शक्ति है। सरल व्यक्ति छल से नहीं, विश्वास से संबंध बनाता है। वह बड़े वादे नहीं करता, बल्कि साथ निभाने का संकल्प रखता है। प्रस्तुत कविता उसी सरल हृदय की अभिव्यक्ति है, जो प्रेम को दिखावे से नहीं, व्यवहार से पहचानता है।
मैं सरल हूँ
मैं सरल हूँ,
और मेरा प्रेम भी
उतना ही सरल है।
यदि तुम समझ सको,
तो जानोगे—
मैं चाँद-सितारे
तोड़ लाने का
वादा नहीं करता।
मैं अनहोनी
कल्पनाओं के
महल नहीं बनाता।
मैं यह भी नहीं कहता
कि तुम्हारे जीवन में
सिर्फ़ खुशियाँ ही भर दूँगा।
लेकिन इतना अवश्य जानता हूँ—
तुम्हारे सुख
और तुम्हारे दुःख,
दोनों
मेरे अपने होंगे।
उन्हें
हम साथ जिएँगे,
और साथ ही
सहन करेंगे।
मैं सरल हूँ,
इतना सरल,
जितना एक फलदार वृक्ष।
लोग
उस पर पत्थर मारते हैं,
फल का स्वाद
तो याद रखते हैं,
पर
पत्थर की चोट
भूल जाते हैं।
मैं सरल हूँ,
इतना पारदर्शी
कि मेरे इरादे,
मेरी नीयत,
आर-पार दिखाई देती है।
मैंने
नक़ाब पहनना नहीं सीखा,
न ही
सियासत के लिए
चेहरा बदलना सीखा है।
मैं सरल हूँ,
लेकिन
दुनिया को समझता हूँ।
जानता हूँ—
मतलब के रिश्ते
मौसम की तरह बदल जाते हैं।
लोग
गिरगिट की तरह
रंग बदल लेते हैं,
पर मैं
अपना स्वभाव
बदल नहीं पाता।
विचार
किसी सरल और सहिष्णु विचार पर कठोर शब्द कहना आसान होता है,
लेकिन
जहाँ प्रतिक्रिया का भय हो,
वहाँ
बहुत लोग
चुप रहना चुन लेते हैं।
वास्तविक समझदारी
सिर्फ़ बोलने में नहीं,
बल्कि
यह जानने में है
कि कब,
क्या,
और कैसे कहा जाए।
जो कल भी
अपने व्यवहार से
दूसरों को दुःख देता था,
आज भी
वैसा ही है।
समय बदला,
पर उसका स्वभाव
नहीं बदला।
वह
मनुष्य तो था,
पर
मनुष्यता से
बहुत दूर था।
उसके तर्क बड़े थे,
पर सहनशीलता छोटी।
वह
दबाव बनाना जानता था,
संवाद करना नहीं।
वह
लोगों के बीच रहता था,
लेकिन
आदमी होकर भी
आदमी जैसा नहीं था।
और अंत में कविता
सरलता का अर्थ अज्ञान नहीं, बल्कि स्पष्टता और ईमानदारी है। जो व्यक्ति बिना दिखावे के प्रेम करता है और बिना छल के जीवन जीता है, वही सच्चे अर्थों में मजबूत होता है।

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