प्रेम, आत्मीयता और रिश्तों की सच्चाई | हिंदी कविता संग्रह poems in hindi
आज का मनुष्य पहले से अधिक जुड़ा हुआ दिखाई देता है, लेकिन भीतर से कहीं अधिक अकेला भी है। संवाद बढ़े हैं, पर आत्मीयता कम हुई है। प्रेम शब्दों से नहीं, बल्कि व्यवहार, जिम्मेदारी और साथ निभाने से सिद्ध होता है। प्रस्तुत कविताएँ इसी बदलते समय, सच्चे प्रेम और रिश्तों की वास्तविक कसौटी पर एक संवेदनशील चिंतन हैं।
आत्मीयता पर कविता
(१) आज की दुनिया
हम जानते हैं
आज की दुनिया को।
हर कोई
खुद में मशगूल हो गया है,
आत्मीयता से दूर हो गया है।
आत्ममुग्धता में डूबकर
अपने ही संसार में खुश है।
जिसकी बातों में
दूसरों के लिए सीख तो बहुत है,
मगर स्वयं
उसे अपनाता नहीं।
शब्दों से बहलाता है,
और अवसर मिलते ही
अपना मतलब निकाल लेता है।
व्यवहार और प्रेम
(२) कभी इक रात में
तुम शामिल होकर देखना
मेरी तनहाई में
मेरी पीड़ा को
महसूस करना
अपने भीतर
तुम्हें महसूस होगा
मैं तेरे बिन
कितना अधूरा हूॅं
मेरी जिंदगी
कितनी प्यासी है
तेरे प्रेम की
जिसे तुम
महसूस नहीं कर
दिन के उजाले में !!!!
बताने की जरूरत नहीं थी
कि प्रेम है
न वादा करने की जरूरत है
यकीन दिलाने के लिए
मैं देख सकता हूं
तुम्हारा प्रेम
जो व्यवहारों पे झलकता है
वादों से ज्यादा
जिम्मेदारी समझता है
ध्यान रखा जाता है
प्रेम का
सम्मान का
जो महसूस हो जाता है
प्रेम के रूप में !!!!
जीवन पर कविता
तुम शामिल होते
मेरे सुख-दुख में
थोड़ी सी दुःखी तो होते
अगर प्रेम होते !!!
रोज़ फ़ोन किया
रोज़ बातें की
जब जरूरत पड़ी
उसकी दोस्ती पे यकीन की
जो कहता था
जो करता था
असली/नक़ली,पहचान की !!!
और अंत में कविता
सच्चे रिश्ते शब्दों से नहीं, समय और व्यवहार से पहचाने जाते हैं। प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण साथ निभाना है। जो व्यक्ति आपकी खुशी में ही नहीं, आपके दुःख में भी खड़ा रहे, वही आत्मीयता का वास्तविक अर्थ जानता है।
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