मतलबी रिश्तों पर दर्द भरी कविता Sad Poem on Selfish Relationships
आज के समय में रिश्तों की सच्चाई अक्सर शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहार में नजर आती है। लोग साथ तो होते हैं, लेकिन दिल से नहीं—और अधिकतर रिश्ते अब भावनाओं से नहीं, बल्कि मतलब से जुड़ते जा रहे हैं।
मतलबी रिश्तों पर दर्द भरी कविता Sad Poem on Selfish Relationships
कौन सोचता है किसी के बारे में
सब मस्त है मतलब निकालने में
कभी फुर्सत होगी बैठना मेरे पास
वर्ना सुकूं ढूंढते रह जाओगे इस जमाने में !!!!
तुम वही हो
जो नहीं हो
कौन नहीं जानता है
तुम गलत हो या सही हो
मतलब पे जीने वाले
तुम किसके हो ?
दिल जानता है मतलबी रिश्तों को
उसके आने के सुकून नहीं मिलता है दिल को
कुछ लूटा जा रहा है
कुछ छूटा जा रहा है
उसकी बातों का मीठापन
खरोंच रहा है मेरे दिल को!!!
अभी और लूटेगा
मतलब निकालने के बाद
रिश्ता टूटेगा
कमबख़्त नादान हो तुम
बर्बाद होने के बाद
तू टूटेगा
अभी भी मौका है सम्भल जाय
आखिर गिरेगा तो
हाथ-पैर,दिल टूटेगा !!!!
इन्हें भी पढ़ें 👉 नदी और पहाड़ की प्रेम कहानी
मतलबी रिश्ते हमें जीवन का एक कड़वा सच सिखाते हैं—कि हर मुस्कान के पीछे सच्चाई नहीं होती। ऐसे रिश्तों से दूर रहना ही बेहतर है और खुद को मजबूत बनाना ही सबसे बड़ी समझदारी है।

0 टिप्पणियाँ