मतलबी रिश्तों पर दर्द भरी कविता Sad Poem on Selfish Relationships

मतलबी रिश्तों पर दर्द भरी कविता Sad Poem on Selfish Relationships

आज के समय में रिश्तों की सच्चाई अक्सर शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहार में नजर आती है। लोग साथ तो होते हैं, लेकिन दिल से नहीं—और अधिकतर रिश्ते अब भावनाओं से नहीं, बल्कि मतलब से जुड़ते जा रहे हैं।

जब भरोसा टूटता है और अपने ही पराये लगने लगते हैं, तब दिल एक ऐसी पीड़ा महसूस करता है जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता।
यह कविता उन ही मतलबी रिश्तों की हकीकत को उजागर करती है, जहां मिठास के पीछे छुपी होती है स्वार्थ की कड़वाहट, और जहां साथ होने के बावजूद भी इंसान खुद को अकेला महसूस करता है।
अगर आपने भी कभी ऐसे रिश्तों का दर्द महसूस किया है, तो यह कविता आपके दिल को जरूर छू जाएगी।

मतलबी रिश्तों पर दर्द भरी कविता Sad Poem on Selfish Relationships

 कौन सोचता है किसी के बारे में 

सब मस्त है मतलब निकालने में


कभी फुर्सत होगी बैठना मेरे पास

वर्ना सुकूं ढूंढते रह जाओगे इस जमाने में !!!!


तुम वही हो 

जो नहीं हो 

कौन नहीं जानता है 

तुम गलत हो या सही हो 

मतलब पे जीने वाले 

तुम किसके हो ?


दिल जानता है मतलबी रिश्तों को 

उसके आने के सुकून नहीं मिलता है दिल को 

कुछ लूटा जा रहा है 

कुछ छूटा जा रहा है 

उसकी बातों का मीठापन 

खरोंच रहा है मेरे दिल को!!!


अभी और लूटेगा 

मतलब निकालने के बाद 

रिश्ता टूटेगा 

कमबख़्त नादान हो तुम 

बर्बाद होने के बाद 

तू टूटेगा 

अभी भी मौका है सम्भल जाय 

आखिर गिरेगा तो 

हाथ-पैर,दिल टूटेगा !!!!

Sad Poem on Selfish Relationships


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मतलबी रिश्ते हमें जीवन का एक कड़वा सच सिखाते हैं—कि हर मुस्कान के पीछे सच्चाई नहीं होती। ऐसे रिश्तों से दूर रहना ही बेहतर है और खुद को मजबूत बनाना ही सबसे बड़ी समझदारी है।


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