सहयोग से समाधान निकलता है | संवाद, दोस्ती और प्रेम पर हिंदी ग़ज़ल

सहयोग से समाधान निकलता है | संवाद, दोस्ती और प्रेम पर हिंदी ग़ज़ल sahyog se samadhan nikalta hai

मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी शक्ति संवाद है। जहाँ संवाद होता है, वहाँ समाधान जन्म लेता है; जहाँ मौन और दूरी बढ़ती है, वहाँ रिश्ते धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं। आज तकनीक ने हमें दुनिया से जोड़ दिया है, लेकिन कई बार अपने ही लोगों से दूर भी कर दिया है। प्रस्तुत ग़ज़ल सहयोग, आत्मीय बातचीत, प्रेम, दोस्ती और आधुनिक जीवन की विडंबनाओं को संवेदनशील शब्दों में व्यक्त करती है। यह केवल प्रेम की नहीं, बल्कि मानवीय रिश्तों को बचाए रखने की भी कविता है।

सहयोग से समाधान निकलता है

 सहयोग से समाधान निकलता है

जैसे सूरज आसमान से निकलता है

आओ,  बैठो पास मेरे , गुफ्तगू करते हैं

तेरे सामने ही मेरा अरमान निकलता है

तुम आए, मगर मोबाइल में व्यस्त हो गए,

मेरे सामने भी एक अजनबी-सा इंसान निकलता है।

मैं चाहता था उसे खुद की तरह मगर 

उसकी हर बात पे फ़रमान निकलता है।

उसके सितम आखिर कब तक चुप सहते 

अब दिल में दबा तुफान निकलता है

भीड़ में शामिल होने की होड़ लगी है,

मतलब पर हर चेहरा अनजान निकलता है।

उसने मुझे देखकर मुस्कुराया ज़रा-सा,

दिल का छुपा हर बयान निकलता है।

ज़माने की बंदिशों से उचट गया मन,

इश्क़ में दिल से एलान निकलता है !!!

हिंदी ग़ज़ल

मरेंगे या बचेंगे, कह नहीं सकते मगर,

आज की ज़िंदगी में जी नहीं सकते मगर।

जो कल तक साथ थे, अचानक दूर हो गए,

हम इतनी जल्दी हार नहीं सकते मगर।

ठीक है, आए हो तो बैठो कुछ देर साथ,

गुफ़्तगू हो तो यूँ बिछड़ नहीं सकते मगर।

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और अंत में गजल 

सच्चे रिश्ते समय, विश्वास और संवाद की नींव पर खड़े होते हैं। जब लोग एक-दूसरे को सुनना छोड़ देते हैं, तब दूरियाँ केवल कदमों की नहीं, दिलों की भी हो जाती हैं। सहयोग और आत्मीय गुफ़्तगू हर उलझन का समाधान बन सकती है, जबकि उपेक्षा और व्यस्तता रिश्तों को धीरे-धीरे खोखला कर देती है। यह ग़ज़ल हमें याद दिलाती है कि जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल सफलता नहीं, बल्कि ऐसे संबंध हैं जिनमें अपनापन, विश्वास और साथ बना रहे। आखिरकार, इंसान को इंसान से जोड़ने वाला सबसे सशक्त माध्यम प्रेम, संवाद और सहयोग ही है।

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