वसंत आएगा – पतझड़ के बाद का नवजीवन- कविता vasant-patjhad-navjeevan-kavita
वसंत ऋतु प्रकृति में नई ऊर्जा और ताजगी का संदेश लेकर आती है। पतझड़ की फिजाओं में पुराने पत्तों का झड़ना केवल एक चक्र है, जिससे प्रकृति नवीनीकरण करती है। यह कविता हमें जीवन के उतार-चढ़ाव और आशा की निरंतरता का अनुभव कराती है। पढ़िए इस पर कविता हिन्दी 👇
वसंत ऋतु कविता
वसंत आएगा,
पतझड़ के संग।
पुराने पत्ते झड़ेंगे,
पतझड़ के संग।
और पेड़ की सुंदरता
कुछ दिनों के लिए
कुरूप हो जाएगी,
लेकिन फ़िक्र की बात नहीं,
फिर से नई पत्तियां आएंगी,
वसंत के संग।
पतझड़ और नवजीवन कविता
जनवरी अभी-अभी बीता है,
लोगों ने कैलेंडर पलटा है,
नववर्ष का उत्सव मनाया,
जो थक चुके थे अपने उत्साह से।
वसंत ने भी गर्माया है।
कभी फुर्सत होगी, तो वसंत आएगा,
जैसे आता है नया साल,
दोस्तों को सूचनाएं देकर
बैठेंगे एक साथ,
रात गुजारी जाएगी जश्न के साथ,
दिन की शुरुआत थकावट के साथ।
लेकिन वसंत नहीं आएगा ऐसे।
वो जब भी आएगा,
उत्साह लाएगा,
नवजीवन लाएगा,
नव कपोलों पर हरियाली छाएगी,
जीवन भर।
-राजकपूर राजपूत "राज "
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