क्या तुम समझ पाओगे? | प्रेम, शब्द और संवेदनाओं पर हिंदी कविता Love Poem Hindi
हर भावना शब्दों में पूरी तरह नहीं उतरती। कई बार प्रेम व्याकरण से परे, छंद से परे और भाषा की सीमाओं से परे जाकर केवल अनुभव बन जाता है। कवि की सबसे बड़ी इच्छा यही होती है कि उसके शब्दों से अधिक उसके भाव समझे जाएँ। यह कविता उसी अनकहे प्रेम और संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है।
क्या तुम समझ पाओगे?
क्या तुम समझ पाओगे
मेरी कविताओं के शब्दों को,
उन अनकहे स्वरों को,
जो हर पंक्ति के पीछे छिपे हैं?
जिन्हें मैं
कभी व्याकरण में बाँध नहीं पाया,
कभी छंदों में सजा नहीं पाया,
कभी ताल और लय में
पूरा उतार नहीं पाया।
वे तो
अचानक फूट पड़ते हैं,
जब तुम्हारी याद
अनायास चली आती है।
कभी दर्द बनकर,
कभी कसक बनकर,
कभी किसी मीठी स्मृति की तरह
मन को छू जाती है।
मेरी कविताएँ
लिखी कम गई हैं,
जी अधिक गई हैं।
इनमें शब्दों से अधिक
मेरी धड़कनों की आवाज़ है,
और पंक्तियों से अधिक
मेरे मौन का विस्तार।
इसी उम्मीद में लिखता हूँ
कि एक दिन
तुम पढ़ोगे
केवल शब्द नहीं,
उनके पीछे छिपे
मेरे मन को भी।
समझोगे
मेरी चुप्पियों को,
मेरे इंतज़ार को,
मेरी अधूरी बातों को,
और शायद...
मेरे प्रेम को भी।
क्योंकि प्रेम
हर बार कहा नहीं जाता,
कई बार
वह केवल महसूस किया जाता है।
और अंत में कविता
कविता की सुंदरता केवल उसकी भाषा में नहीं, बल्कि उसकी अनुभूति में होती है। जब पाठक शब्दों से आगे बढ़कर भावों तक पहुँच जाता है, तभी कविता अपना वास्तविक अर्थ प्राप्त करती है।
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