मोहब्बत और सियासत – हिंदी कविता Love and Politics – Hindi Poem
अक्सर एक विचार देखा जाता है । कुछ सहनशील समाज, धर्म आलोचना करना बहुत ही सहुलियत महसूस करते हैं । ये परम्परा बहुत पहले से चली आ रही है । न जाने कितने लोग ऐसी आलोचना करके महान लेखक, विद्वान, पत्रकार बन गए । जो कभी अपनी विद्वत्ता कट्टर, सियासी पंथों पर नहीं दिखा सकें । जिसे लोग धीरे-धीरे समझने लगे शायद इसलिए अब उपदेश देना रट्टा मार विद्वान सा लगता है । जिसमें साहस नहीं है कि कट्टर सियासी पंथों को समझाने का । पढ़िए इसी पर कविता👇
🌸 कविता: मोहब्बत और सियासत 🌸
सियासत को दिल में इतनी जगह न दें,
मोहब्बत की पहचान न होगी।
लिखते हो गज़ल आजकल तो,
शर्त रखो कोई सियासत की बात न होगी।
दोनों तरफ को समझा पाना मुश्किल है,
गलत को गलत कहना था,
तुम्हारी शराफ़त में कोई गलती न होगी।
सामूहिकता का ज्ञान दोष ढूंढ नहीं पाते,
भाईचारे की बात, कोई आतंकी न होगी।
दोषारोपण लगाकर शरीफ़ न बन,
अपराध एक है, कोई तुलना न होगी।
बहलाकर लोगों को बातें बताते हो,
क्या तुम में कोई खुराफात न होगी?
तिलक, गुलालों पर खूब दोष ढूंढे,
रोज-रोज कहना रूढ़िवादी न होगी।
✨ नए जोड़ें हुए लाइनें ✨
सच्चाई की राह पर कदम रखें,
दिल में मोहब्बत और इमानदारी रखें। 💖
समाज की बुनियाद मजबूत बने,
झूठ और छल से दूरी रखें। 🌿
मोहब्बत की पहचान हर दिल में रहे,
सियासत के रंग कभी दिल में न बसे।
सत्य और भाईचारे की जो राह पकड़ ले,
उसकी रोशनी से अंधकार खुद भाग जाए। 🌟
🌟 संदेश और निष्कर्ष 🌟
यह कविता यह सिखाती है कि सियासत और मोहब्बत को एक साथ नहीं चलाना चाहिए।
जब दिल सच्चाई और भाईचारे से भरा हो, तो प्यार की पहचान मजबूत रहती है।
सच, मोहब्बत और ईमानदारी ही समाज को जोड़ते और उजागर करते हैं।
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