सम्भावनाओं का टूटना – अधूरा अहसास और प्रेम की गहराई sambhavanayon-ka-tootna-adhoora-ahsas
कविता केवल शब्दों का खेल नहीं होती, बल्कि यह उन भावनाओं और अहसासों का प्रतिबिंब होती है, जिन्हें शब्दों में पिरोना मुश्किल होता है। “सम्भावनाओं का टूटना” इसी गहराई की कहानी कहती है – एक ऐसे प्रेम और जीवन की अनुभूति की, जिसमें उम्मीदें बहुत थीं, लेकिन साथी का साथ न होने के कारण सब अधूरा सा लगने लगा। यह कविता पढ़ने वाले को उस तन्हाई और अहसास में ले जाती है, जहां प्रेम की गहराई और संभावनाओं का टूटना एक साथ महसूस होता है।
कविता: सम्भावनाओं का टूटना
उम्मीद तो बहुत थी
जीने की राह भी बहुत थी।
अब क्या तुम्हें बताएं,
केवल साथ तू नहीं थी।
यह दरिया, नदियां, फूल-पत्ते,
सब थे यहाँ अच्छे-अच्छे।
लेकिन अब क्या तुम्हें बताएं,
तुझ बिन सब फीके-फीके हैं।
दिल मेरा यहाँ ठहरा था,
हृदय प्रेम से भरा था।
जिंदगी को जिसकी तलाश थी,
केवल वही मेरे पास नहीं थी।
सम्भावनाओं का टूटना
तुम्हारा यूँ रूठना,
एक कमी भर गई,
आंखों को नमी कर दी।
अधूरा सा अहसास,
क्योंकि तू नहीं पास।
तुम्हारे जाने के बाद,
मेरी सम्भावनाओं का टूटना,
जैसे जीवन का छूटना।
कभी तन्हा में हरा था,
जीवन भरा था।
अब भीड़ भी बोझिल लगता है,
अब अधूरा लगता है।
तुम्हारा साथ का छूटना,
मेरी सम्भावनाओं का टूटना।
-राजकपूर राजपूत "राज "
इन्हें भी पढ़ें 👉 बर्दाश्त करना कविता हिन्दी

0 टिप्पणियाँ