सभ्यता का प्रदर्शन | दिखावे और वास्तविक व्यवहार पर हिंदी कविता sabhyata ka pradarshan hindi-kavita
सभ्यता केवल विनम्र शब्दों या मुस्कान का नाम नहीं है। उसका वास्तविक स्वरूप हमारे व्यवहार, संवेदनशीलता और निरंतर आचरण में दिखाई देता है। आज के समय में शिष्टाचार का प्रदर्शन करना आसान हो गया है, लेकिन उसे जीवन का स्थायी गुण बनाना चुनौतीपूर्ण है। प्रस्तुत कविता इसी अंतर को समझने का प्रयास करती है।
सभ्यता का वास्तविक मूल्य तब है जब वह परिस्थितियों के बदलने पर भी बनी रहे। यदि विनम्रता केवल दिखावे तक सीमित हो, तो वह टिकाऊ नहीं होती। सच्चा संस्कार वही है जो बिना किसी स्वार्थ के, हर परिस्थिति में मनुष्य के व्यवहार में झलके और रिश्तों को विश्वास तथा सम्मान से जोड़कर रखे।
सभ्यता पर कविता
सभ्यता का प्रर्दशन आजकल
बड़े ही आसानी से हो जाती है
चेहरे के भावों और शब्दों की सजावट में
हर कोई कर लेते हैं
जब भी मिलते हैं
दो रिश्ते
कभी-कभी
बातों में अपनापन का भाव
लरकता है
बड़ी सहजता से
ताकि लगे
सामने वाले को
देखने वाले को
उनके व्यवहार की सभ्यता
पढ़ें लिखे होने का प्रमाण
सबको मिल जाए
बेशक ये क्षणिक है
या फिर बनावटी है
फिर भी
लोगों के मुंह पर
ताला है
जो सामने कभी
उसपर
सवाल उठा नहीं सकते हैं !!!
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