गमलों की हरियाली | प्रकृति और आधुनिक जीवन पर हिंदी कविता
प्रकृति केवल देखने की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। आज आधुनिक जीवन में हम घरों को सजाने के लिए गमलों और फूलों का सहारा लेते हैं, लेकिन कई बार उसी प्रकृति को नुकसान भी पहुँचाते हैं जो हमें जीवन देती है। प्रस्तुत कविता इसी विरोधाभास पर चिंतन करती है और हमें याद दिलाती है कि सच्चा प्रेम केवल सजावट से नहीं, बल्कि संरक्षण से प्रकट होता है।
फूलों की सुंदरता तभी सार्थक है जब उनके साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी हो। यदि हम केवल अपने घरों को हरा-भरा रखें और धरती की हरियाली को भूल जाएँ, तो यह अधूरा प्रयास होगा। सच्ची सुंदरता तब है जब सजावट के साथ संरक्षण और सुविधा के साथ संस्कार भी जुड़े हों।
गमलों की हरियाली कविता
उसने खरीदें हैं
दो चार गमले
फूलों वाले
घर की सजावट के लिए
जिसे टांग दिए हैं
अपनी छतों के
छज्जों पर
ताकि देखने वाले को
लगे अच्छा
और उसके चेहरे पर
ताजगी रहे
दिल खुश रहे
और मन
महसूस करें
अच्छा
ताकि तारीफ हो
उसके घर की
उसकी नजर की
जिसने कभी देखा होगा
हकीकत में
फूल और पेड़-पौधों
जिसकी सुन्दरता खींची होगी
मन को
बरबस ही
हालांकि ये बनावटी हैं
लेकिन क्या करें
आजकल के इंसान
इसकी आदी हैं !!
गमलों पर कविता
सजाने की कोशिश की है गमलों को
कुल्हाड़ी से काट कर पेड़ को
वे आजकल शिक्षित हुए मगर
मतलबी हुए और छोड़कर संस्कारों को
---राजकपूर राजपूत
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