Mere Geet – Shayari, Kahani aur Lyrics
Home
Kavita
Kahani
Gazal
Geet
Lekh
Shayari
Upnyas
मुख्यपृष्ठ
गजल
जब भी हार जाता हूॅ॑
जब भी हार जाता हूॅ॑
जनवरी 18, 2021
जब भी हार जाता हूॅं
खुद को अकेला पाता हूॅं
इस भीड़ भरी दुनिया से
जब भी लड़ नहीं पाता हूॅ॑
कोई सुनने वाला नहीं होता है
खुद कहता हूॅं खुद सुनता हूॅं
चंद सवाल जो उठ आते हैं
तन्हाई में जवाब ढूॅंढता हूॅं
---राजकपूर राजपूत''राज''
Reactions
एक टिप्पणी भेजें
1 टिप्पणियाँ
Sonu sahu
18 जनवरी 2021 को 6:32 pm बजे
Bahut hi sundar rachana sir
जवाब दें
हटाएं
उत्तर
जवाब दें
टिप्पणी जोड़ें
ज़्यादा लोड करें...
Search This Blog
Popular Posts
Contact form
1 टिप्पणियाँ
Bahut hi sundar rachana sir
जवाब देंहटाएं