उम्मीद, विश्वास और अधूरा प्रेम | दर्द और प्रतीक्षा पर हिंदी कविता toota vishwas hindi-kavita
प्रेम केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि विश्वास, उम्मीद और समर्पण का दूसरा नाम है। जब विश्वास टूटता है, तब केवल रिश्ता ही नहीं टूटता, बल्कि मनुष्य की उम्मीदें भी बिखर जाती हैं। फिर भी प्रेम करने वाला व्यक्ति नफ़रत नहीं सीखता; वह टूटकर भी उम्मीद का एक दीप जलाए रखता है। यह कविता उसी मौन पीड़ा, प्रतीक्षा और टूटे हुए विश्वास की कहानी है।
तुमसे एक सवाल
तुमसे एक सवाल है मेरा,
बताओ, क्या जवाब है तेरा?
करके बेवफ़ाई मुस्कुराते हो,
इश्क़ में कैसा हिसाब है तेरा?
उम्मीद
जब तक उम्मीद बनी रही,
मैंने अपने प्रेम को संभाले रखा।
अविश्वास के हर प्रस्ताव को
यही सोचकर ठुकराया
कि शायद मेरा संदेह ही गलत हो।
मैंने प्रेम में
फिर से जीना सीखा,
अपनी उम्मीदों के सहारे।
जबकि मेरा प्रेम
अविश्वास से
बहुत पहले ही हार चुका था।
मेरी उम्मीद
जटिलताओं से भरी रही—
कभी टूटती,
कभी फिर जुड़ती।
हर दिन,
हर रात,
वही उम्मीद
मुझे बार-बार
जीने भी देती रही,
और भीतर ही भीतर
मारती भी रही।
सरल नहीं था
मेरा जीवन
मैं अपनी ही उम्मीदों के चक्र में
उलझा रहा,
इस अविश्वास के दौर में भी
किसी पर विश्वास करता रहा।
मेरी उम्मीद,
मेरी आशा,
मेरे जीवन की परिभाषा थी।
तुम जब-जब
मुझे ठगते रहे,
शायद तुम्हें सुकून मिलता रहा।
मैं मरा तो नहीं,
पर सच यह है कि
उस दिन के बाद
पूरा जी भी नहीं पाया।
क्योंकि तुम
मेरा प्रेम ही नहीं,
मेरा विश्वास भी
तोड़ चुके थे।
और अंत में कविता
विश्वास टूटने का दर्द समय के साथ हल्का हो सकता है, लेकिन उसकी स्मृति लंबे समय तक मन में बनी रहती है। प्रेम की सबसे बड़ी शक्ति उसका विश्वास है, और वही टूट जाए तो मनुष्य जीवित रहकर भी भीतर से अधूरा महसूस कर सकता है।
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1 टिप्पणियाँ
Nice
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