निःशब्द प्रेम | मौन प्रेम और गहरी अनुभूति पर हिंदी कविता

nihshabd prem hindi-kavita निःशब्द प्रेम | मौन प्रेम और गहरी अनुभूति पर हिंदी कविता

हर प्रेम शब्दों से व्यक्त नहीं होता। कुछ प्रेम ऐसे होते हैं, जो आँखों की भाषा, मौन की गहराई और मन की अनुभूतियों में जीवित रहते हैं। जहाँ शब्द समाप्त हो जाते हैं, वहीं से सच्चे प्रेम की शुरुआत होती है। यह कविता उसी निःशब्द प्रेम की अभिव्यक्ति है।

निःशब्द प्रेम


प्रेम एक मौन स्वीकृति है,
तेरे और मेरे बीच की
गहरी अनुभूति है।

आँखों के रास्ते
जो हृदय में उतर जाता है,
बोझिल-सी ज़िंदगी को भी
नई रोशनी दे जाता है।

मेरा प्रेम निःशब्द है,
उसे शब्दों की ज़रूरत नहीं।
जहाँ मन एक-दूसरे को
बिना कहे समझ ले,
वहीं प्रेम अपनी
सबसे सुंदर अवस्था में होता है।

आख़िर संवाद कहाँ...?
और जहाँ केवल संवाद ही रह जाए,
वहाँ प्रेम कहाँ...?

बस एक आहट सुनाई देती है,
मानो हवा धीरे से गुज़रती हो,
तन को छूकर,
मन को कंपा देती हो।

तुम्हारे स्पर्श का
एक क्षण भर का एहसास भी
दिल की धड़कनों को
बढ़ा देता है।

तड़प उठता है मन,
तुम्हें पाने की नहीं,
तुम्हें महसूस करने की चाह में।

इस सूनी दुनिया में,
इस कसक भरे जीवन में,
मेरी नज़रें
सिर्फ़ तुम्हें तलाशती हैं।

और मेरी आशा है,
एक दिन तुम
मेरे मौन को पढ़ लोगे,
मेरी ख़ामोशियों में छिपे
प्रेम को समझ लोगे।

शायद तब
तुम प्रेम की
नई परिभाषा लिखोगे।

क्योंकि मेरा प्रेम
शब्दों में नहीं,
अहसासों में बसता है।

मेरा प्रेम निःशब्द है,
और मुझे विश्वास है—
उसे सबसे पहले
तुम ही पढ़ पाओगे।

और अंत में कविता 

सच्चा प्रेम हमेशा शब्दों का मोहताज नहीं होता। वह आँखों की भाषा, स्पर्श की गरिमा, मौन की गहराई और विश्वास की अनुभूति में जीवित रहता है। जिसे प्रेम समझना आता है, वह बिना कहे भी सब कुछ सुन लेता है।
इन्हें भी पढ़ें 👉 प्रेम की परिभाषा 

___ राजकपूर राजपूत'राज'
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