मैंने आज कुछ नहीं लिखा: भावनाओं, एकांत और रिश्तों की सच्चाई Life Truth Poetry Hindi
कभी-कभी जीवन में ऐसे दिन आते हैं जब मन कुछ भी लिखने या कहने का नहीं करता। भीतर भाव होते हैं, लेकिन शब्द नहीं मिलते। यह कविता उसी खालीपन, आत्मसंघर्ष और रिश्तों की बदलती सच्चाई को दर्शाती है—जहाँ इंसान खुद से भी दूर हो जाता है और दुनिया से भी। दुनिया की समझ जैसी बनने लगती है । महसूस होने लगता है कि हमारी उपस्थिति केवल मतलब की प्राथमिकताओं पर निर्भर है । मतलब निकल जाने के बाद क़ीमत नहीं रहती है । पढ़िए रिश्तों की भावनाओं, एकांत मन पर बेहतरीन कविता 👇
मैंने आज कुछ नहीं लिखा: भावनाओं, एकांत और रिश्तों की सच्चाई Life Truth Poetry Hindi
मैंने आज कुछ नहीं लिखा था,
न लिखने का मन हुआ था।
आज अलसाया हुआ था मन,
जिसने जीवन को न छुआ था।
भटकता रहा, ढूँढता रहा
वो भाव,
वो शब्द,
जिनसे एहसासों को उकेरा जा सके।
कुछ महसूस न हुआ था,
मैंने आज कुछ नहीं लिखा था।
दिन बीत गया और रात हो गई,
उसकी याद आई और उतर गई।
हृदय तोड़ा उसने,
अब महसूस न हुआ था,
मैंने आज कुछ नहीं लिखा था।
एकांत और रिश्तों की सच्चाई
जो चाहो मिल जाए,
मन की मुरादें पूरी हो जाएँ,
हम तुम्हें याद करते हैं—
हमारी याद तुम्हें भी आ जाए।
जो रिश्तों को
प्राथमिकताओं के आधार पर
वर्गीकृत करता है,
वह बाकी रिश्तों को
व्यर्थ कर देता है।
लाख कर लो स्वागत अगुवाई में,
एक कमी पर
सब कुछ कम कर देता है।
मेरी खूबियों में कमियाँ निकालेंगे,
अपनी कमियों में खूबियाँ बताएँगे।
जीने के उनके अपने तरीके हैं,
मतलब के उनके सलीके हैं,
निकालने के मीठे तरीके हैं,
अपनी प्राथमिकताओं में लौट आने के सलीके हैं।
उसने रिश्तों का वर्गीकरण
कुछ इस तरह किया है...
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