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कविता
रिक्शा ठेलता हुआ आदमी कविता
रिक्शा ठेलता हुआ आदमी कविता
जून 07, 2022
भरी दुपहरी में
जेठ के महीने में
रिक्शा ठेलता हुआ आदमी
आदमी का बोझ उठाए हुए आदमी
अभ्यस्त नहीं है
भीषण गर्मी का
तेज धूप में
जलने का
सिर्फ आदी है
अपने अरमानों का
इसलिए चलता है
कड़ी धूप में !!!
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