शाम की उदासी में कविता ,जीवन की तनहाई evening-on-poem-in-hindi 

जीवन में कई ख्वाब अधूरे रह जाते हैं। कभी हमारी थकावट, कभी परिस्थितियों की बाधाएँ, कभी समाज की उदासीनता—इन सब वजहों से हम अपने सपनों को पूरी तरह जी नहीं पाते। यह कविता उसी भाव को व्यक्त करती है: अधूरा ख्वाब, अकेलेपन की अनुभूति और फिर खुद को फिर से तैयार करना।

जब घर लौट आते हैं । अपनी तलाश में थक जाते हैं । तब सोच बनती है कि कल फिर कोशिश होगी । दुगना उत्साह के साथ होगी । अपनी कमी को सुधार कर खुद को तैयार करना ही जीवन है । कविता हिन्दी में 👇👇

evening-on-poem-in-hindi.शाम की उदासी में कविता 

शाम की उदासी में
अपनी तलाश को परखता हूॅ॑
रात के अंधेरे में
अपने ख्वाबों में
तुझे संवारता हूॅ॑
कितना तन्हा है चाॕ॑द
सितारों के बीच में
रातभर निहारता हूॅ॑
कल सुबह होगी
सूरज निकल जाएगा
दिन के उजाले में
चाॅ॑द का दर्द छुप जाएगा
जिसे समझने वाला
कोई नहीं रह जाएगा  !!!

अकेलापन और सोच -कविता 


एक ख्वाब जो अधूरा रह गया था
उसे फिर सजाने लगा हूं मैं
मेरी कोशिश में कमी है
पछताने लगा हूं मैं
कमी देखी, कल के लिए विश्वास देखा
आने वाला कल के लिए
खुद को तैयार करने लगा हूं
एक ख्वाब अधूरा रह गया था
उसे फिर से सजाने लगा हूं मैं !!!!

कितना अकेला हो जाता है 
शाम को घर लौट जाने के बाद 
दिन भर मतलबी लोगों के बीच, जीने के बाद 
विचार आता है 
जीवन कितना कठिन है 
अपनी ही थकावट सुनाने से पहले 
लोग सुना देते हैं 
अपनी परेशानी 
कितना अकेला हो जाता है 
मन की बातें मन में रह जाता है !!!!
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-राजकपूर राजपूत "राज "