मेरी बात मान लो कविता poem on life

मेरी बात मान लो कविता poem on life

रिश्तों की सबसे मजबूत नींव विश्वास होती है। झूठ और चालाकी कुछ समय के लिए लाभ दे सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक किसी भी संबंध को नहीं संभाल सकते। जहाँ विश्वास टूटता है, वहाँ शब्दों का महत्व भी कम हो जाता है। यह कविता सत्य, ईमानदारी और आत्मीय संबंधों की इसी भावना को व्यक्त करती है।

मेरी बात 

 झूठ मत बोलो

रिश्तों को चलाने

मेरी बात मान लो

चालाकियां सदा 

काम नहीं आती

ये बात जान लो

जिस दिन पकड़े गए

उस दिन हैसियत गई

इसे गांठ बांध लो !!!


उसने बहुत जल्दी ही 

किसी बहाने से 

निशाना चुन लिया 

बात कुछ और थी 

हिन्दू धर्म बदनाम कर दिया 

एक होली के रंग से डर जाने वाले लोग 

खूनी पर्व को पवित्र कहते हैं, ऐसे दोगले लोग 

गला रेत कर भी सफाई देते हैं 

ये गिरे हुए लोग !!!!

एजेंडों पर ध्यान 

इतना ही ज्ञान 

कभी सच बोल नहीं सकते 

दोगलापन जान !!!

-राजकपूर राजपूत "राज "

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poem on life


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