🌸 दिल, दिमाग और रिश्ते – हिंदी कविता dil-dimaag-rishte 🌸
जीवन में रिश्तों और संबंधों को समझना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है।
यह कविता दर्शाती है कि दिल और दिमाग, परंपरा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सियासत और प्यार—इन सभी के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण है।
✨ कविता: दिल, दिमाग और रिश्ते ✨
दिल और दिमाग का,
रिश्तों में हिसाब का,
व्यापार करना जरूरी है,
मतलब बेहिसाब का। 💭
अच्छी बातें सब भूल गए,
अमल कौन करते हैं किताब का। 📚
चतुर वो भी है,
चतुर तुम भी हो,
ख्याल कौन रखे यहाँ दिल का? 💔
वो कहना सीखा है शरीफ़ों के लिए,
उसे ध्यान है बदमाशों का।
बहलाने के लिए कई तरीके हैं,
उसे बहुत ज्ञान है सियासत का।
अब तुम ही तलाशो राज प्यार,
मतलब नहीं समझा इस संसार का! 🌿
जब मान्य हो जाता है कोई परंपरा,
सबको लगता है वाजिब और सहारा।
जीने के तरीके अपनाने लगते हैं,
चलन में वही वाजिब लगते हैं।
मगर आजकल का चलन,
लोगों की जलन,
अति व्यक्तिवादी से है,
जिसमें स्वयं जीने के आदि हैं।
इसलिए व्यक्तिवादी है,
अब हारा है,
स्वयं का नहीं सहारा है! ⚡
और अंत में कविता
यह कविता यह सिखाती है कि रिश्तों, समाज और व्यक्तिगत सोच में संतुलन बनाना कठिन है।
दिल और दिमाग के बीच का संघर्ष, सियासत और अवसरवादी सोच और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की जटिलताएँ—ये सब जीवन के अनुभव का हिस्सा हैं।
सच्चा ज्ञान वही है, जो दिल और दिमाग को समझकर, प्रेम और न्याय के साथ जीवन जीने में काम आए। 🌸
-राजकपूर राजपूत "राज "
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