पेड़ों का महत्व और मानव जीवन कविता peadon-ka-mahatva-prem-samvedana kavita
प्रकृति और मानव जीवन का गहरा संबंध हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। इस कविता में पेड़ों की महत्ता, मानव के व्यवहार और प्रेम के अनुभव को भावपूर्ण ढंग से व्यक्त किया गया है। यह हमें याद दिलाती है कि जीवन में संवेदनशीलता, प्रेम और प्रकृति का सम्मान कितना आवश्यक है। सभ्यता की शर्तें हैं, अपने साथ बहुत कुछ नवीनता लाती है मगर साथ में सामंजस्य स्थापित करने के लिए समय नहीं निकालती है । पढ़िए इस पर कविता हिन्दी 👇
कविता: मौर (फूल) आ गया है
मौर (फूल) आ गया है
पेड़ों पर,
लेकिन अभी ध्यान नहीं है
पेड़ों पर।
फल लगने दें,
कुछ पकने दें,
दो-चार पत्थर पड़ेंगे
पेड़ों पर—
इंसानों के!
मैंने प्रेम में
केवल महसूस नहीं किया,
तुझमें प्रेम
या मेरे भीतर की पीड़ा,
सहसा तुम्हें देखकर
कम नहीं हुई।
बल्कि तुम्हारी पीड़ाओं को
महसूस किया,
और मुझे लगा कि
हम दोनों एक हैं।
यह जानकर अलग होना
या दूर जाना
ठीक नहीं है।
मनुष्य ने हमेशा बेहतर किया
अपने नंगेपन को छोड़कर।
पेड़ों के पत्ते और छाल लपेट कर,
रेशम से धागे बुनकर,
पत्ते और छाल छोड़े,
जो अभी तक साथ थे।
मात्रात्मक दृष्टि से
उस समय कम सभ्य था।
सभ्यता की शुरुआत
मखमली कपड़ों से हुई,
जहां अपनी चाल छुपाने के लिए
सुंदर कपड़े जरूरी थे।
फिर भी मनुष्यों ने पेड़ों का महत्व जाना,
क्योंकि वे जानते थे—
पैदा होने से मृत्यु तक
पेड़ साथ रहते हैं।
मगर अंतिम संस्कार के लिए
जब अविष्कार हुआ—
बिजली दाह,
तब से मनुष्यों ने
पेड़ों को भूलना शुरू किया।
-राजकपूर राजपूत "राज "
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