क्योंकि रुत पतझड़ हो गया है
जमाना नहीं बदला है
मतलब के हिसाब से
आदमी सेट हो गया है
खुशी नहीं मिलती है अब कहीं
हर चीज़ जैसे अभ्यस्त हो गया !!!
मतलबी होना
नेगलेक्ट करने का तरीका है
जैसे लोग जानते हैं
सही बात
लेकिन चुप रहते हैं
उसके मतलब पर
कोई ख़तरा तो नहीं है
बोलेंगे वहीं
जहां मतलब नहीं
समझदारी का मापदंड
शिक्षित होने का रूप है !!!
बताना तो बहुत चाहता हूं
लेकिन तेरे इरादे समझता हूं
सुविधा को कोई खलल न हो
तेरी चुप्पी समझता हूं !!!
तुम मुझे आज़माने की कोशिश न कर
मैं प्यार करता हूं तू प्यार की कोशिश न कर
बस समझने की बात है
मगर व्यवहार की बात है
दिखावा चाहे कुछ भी हो
साथ रहकर विश्वासघात की बात है
मैं समझता हूं तेरी मजबूरी
छूपा रहे हो कोई बात
जैसे कोई सियासत की बात हो
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