मैं क्या कहूँ | अधूरे प्रेम और अनकहे दर्द पर हिंदी कविता adhura prem hindi-kavita

मैं क्या कहूँ | अधूरे प्रेम और अनकहे दर्द पर हिंदी कविता adhura prem hindi-kavita


हर भावना शब्दों में व्यक्त नहीं की जा सकती। कई बार प्रेम इतना गहरा होता है कि वह मौन बन जाता है। जब दो लोगों की चाहत, समझ और जीवन-दृष्टि अलग हो जाए, तब शब्द भी अधूरे पड़ जाते हैं। यह कविता उसी मौन प्रेम और भीतर छिपे दर्द की अभिव्यक्ति है।

मैं क्या कहूँ कविता 

मैं क्या कहूँ?
बस इतना कि—
मेरे अधर प्यासे हैं,
कंठ सूखा है,
और मेरा हृदय
तुम्हारे प्रेम का
अब भी अभिलाषी है।
मैं क्या लिखूँ?
मेरी कविताएँ,
मेरे शब्द,
मेरे भाव—
सब अधूरे हैं।
तुम्हारे बिना
वे पूर्ण कहाँ हो पाते हैं?
तुम्हारी समझ
मेरी समझ से भिन्न है,
शायद इसी कारण
मेरे शब्द
तुम तक पहुँच नहीं पाते।
इसलिए
मैं क्या कहूँ
अपने हृदय की बात?
हर बार
तुम्हारी बातें सुनकर
मन कहीं
चुप हो जाता है।
कुछ आघात
शब्दों से नहीं,
मौन से मिलते हैं।
इसलिए
मैं चुप रहता हूँ।
तुम्हारी चाहत
मेरी चाहत से
अलग है।
तुम्हारे रास्ते
और मेरे सपने
एक-दूसरे से
मिल नहीं पाते।
इसलिए
मैं अपने ही भीतर
खोया रहता हूँ,
अपने दर्द के साथ,
अपनी स्मृतियों के साथ।
बहुत कुछ कहना चाहता हूँ,
पर तुम्हारे सामने
शब्द
मेरा साथ छोड़ देते हैं।
और तब
मेरा मौन ही
मेरी सबसे लंबी कविता बन जाता है।
adhura-prem-hindi-kavita

और अंत में कविता 

प्रेम का सबसे गहरा रूप कई बार शब्दों में नहीं, बल्कि मौन में व्यक्त होता है। जब हृदय बोलना चाहता है और शब्द साथ नहीं देते, तब कविता जन्म लेती है। 
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