छोटा सा जीवन | उम्मीद, संघर्ष और सपनों पर हिंदी कविता jeevan ke sapne hindi-kavita

छोटा सा जीवन | उम्मीद, संघर्ष और सपनों पर हिंदी कविता jeevan ke sapne hindi-kavita

जीवन लंबा हो या छोटा, उसका मूल्य उसके अनुभवों, आशाओं और प्रेम में छिपा होता है। हर मनुष्य अपने भीतर कुछ छोटे-छोटे सपने, कुछ अनकही इच्छाएँ और एक बेहतर कल की उम्मीद लेकर चलता है। दूसरी ओर, प्रकृति हमें सिखाती है कि जीवन बिना शोर किए भी अपना अस्तित्व बनाए रखता है। प्रस्तुत कविता जीवन, संघर्ष, उपेक्षा और आशा के इन्हीं विविध रंगों को अभिव्यक्त करती है।

छोटा सा जीवन कविता 

छोटा-सा जीवन है,
छोटा-सा अरमान है।
फूल खिले हैं बाग़ों में,
हर चेहरे पर मुस्कान है।
कुछ आशाएँ बंधी हुई हैं,
फिर भी दिल नादान है।
चलो, साथ तुम मेरे,
यह रास्ता अभी अनजान है।
मंज़िल चाहे दूर सही,
सफ़र में ही सम्मान है।
जब तक साँसों का साथ रहे,
उम्मीद ही पहचान है।

अनजान पौधे 

अनजान जगहों पर उगे हुए पौधे,
खुद ही जागे, खुद ही बढ़े।
न किसी ने सींचा उन्हें,
न किसी ने प्यार दिया।
ममता से वंचित वे अंकुर,
मौन खड़े रह जाते हैं।
कई बिना खिले ही मुरझा जाते हैं,
बिना बताए, बिना जाने।
फिर भी प्रकृति हर बार
नई हरियाली का विश्वास जगाती है।

उम्मीद लगाए बैठा मन

ढूँढ़ता हुआ जीवन,
पिसता हुआ तन,
फिर भी उम्मीद लगाए बैठा है
यह बेचैन मन।
कभी ऊँची इमारतों को देखता है,
उन पर सजे रंगीन दीपों को।
सोचता है—
क्या कभी मेरे हिस्से भी
ऐसी रोशनी आएगी?
दिनभर कारखानों में
पसीना बहाता शरीर,
थककर भी सपनों का दामन
छोड़ नहीं पाता।
उम्मीद लगाए बैठा है,
पूछता हुआ मन—
क्या मेहनत का भी
एक उजला सवेरा होगा?
क्या कभी संघर्ष की राह पर
सपनों का फूल खिलेगा?

और अंत में कविता 

जीवन का सबसे बड़ा सहारा उम्मीद है। संघर्ष चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, यदि मन में विश्वास जीवित है तो आगे बढ़ने की शक्ति बनी रहती है। प्रकृति, जीवन और मनुष्य—तीनों हमें यही सिखाते हैं कि हर अँधेरे के बाद एक नई सुबह अवश्य आती है।
---राजकपूर राजपूत''राज''

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