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गजल
सबकी मंजिल एक सी
सबकी मंजिल एक सी
राजकपूर राजपूत
सितंबर 07, 2020
सबकी पूजा एक सी
दिल की दुआ एक सी
बस सुकून भरे लम्हें हो
खैरियत मांगे एक सी
वो धूप में जलता रहा
सबकी मंजिल एक सी
अपनी निगाहों में बसाए रखा
मंदिर की मूर्ति एक सी
दिल की बैचैनी बताती है
सबकी मोहब्बत एक सी
सर झुकाकर आया हूॅं
सबकी प्रार्थना एक सी
गजल
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1 टिप्पणियाँ
Sonu sahu
7 सितंबर 2020 को 6:39 pm बजे
Bahut hi sundar
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Bahut hi sundar
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