Mere Geet – Shayari, Kahani aur Lyrics
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कविता (क्षणिका)
गुरूदेव
गुरूदेव
जुलाई 05, 2020
जितना जाना था
सबको बताया था
अपने अनुभवों से
जिसने जीवन सवारा था
जीवन पथ पर
चलना सिखाया था
मार्ग के कांटों को
प्यार से हटाया था
कैसा अनोखा प्रेम था
आठों पहर
जिसकी आंखों में
अपार स्नेह था
वो मेरे-
पुजनीय गुरूदेव था
जय गुरुदेव 🙏🙏
---राजकपूर राजपूत''राज''
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1 टिप्पणियाँ
Unknown
11 जुलाई 2020 को 3:48 pm बजे
जय गुरुदेव
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