सभ्यता का प्रदर्शन | सत्य, व्यवहार और समाज पर विचारोत्तेजक हिंदी कविता sabhyata-ka-pradarshan-hindi-kavita
सत्य और सभ्यता का मूल्य तभी है, जब वे परिस्थितियों के अनुसार बदलें नहीं। यदि सच सुविधा का विषय बन जाए और सभ्यता केवल प्रदर्शन का माध्यम रह जाए, तो मनुष्य का चरित्र शब्दों से नहीं, उसके व्यवहार से पहचाना जाता है। यह कविता उसी विरोधाभास पर प्रश्न उठाती है।
सभ्यता पर कविता
आजकल के जमाने में
किसी के सच और झूठ
उसके इरादें हैं
जिसे वो
अपनी सहुलियत में
अपनाते हैं
सच की बातें केवल
लोगों के लिए
प्रमाणिकता है
समाज में
सभ्य इंसान
कहलाने के लिए !!!
सभ्यता
उसके शब्दों में हैं
उसके कपड़ों में हैं
जब वो निकलता है घर से
कुछ लोगों से कट जाता है
कुछ लोगों से जुड़ जाता है
कट जाने और जुड़ जाने से
लोगों को रेखांकित करता है
अहमियत के हिसाब से
जिसे वो अपनी बौद्धिक क्षमता कहते हैं
बाकी बाहरी लोगों के लिए
सभ्यता का प्रदर्शन !!!!!
और अंत में कविता
सभ्यता का वास्तविक अर्थ बाहरी शिष्टाचार नहीं, बल्कि निष्पक्षता, ईमानदारी और समान व्यवहार है। जब शब्द और व्यवहार एक हो जाते हैं, तभी मनुष्य सचमुच सभ्य कहलाने योग्य होता है।
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---राजकपूर राजपूत''राज''
1 टिप्पणियाँ
बहुत बढ़िया
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