दिल-ए-नादाँ | इश्क़ और इंतज़ार पर हिंदी ग़ज़ल dil-e-nadan hindi-ghazal
इश्क़ केवल मुस्कुराहटों का नाम नहीं, बल्कि प्रतीक्षा, बेचैनी, संकोच और अनुभवों का भी नाम है। यह ग़ज़ल प्रेम के उन्हीं रंगों को चित्रित करती है, जहाँ आशा, दर्द, मौन और जीवन के छोटे-छोटे दृश्य एक साथ दिखाई देते हैं।
दिल-ए-नादाँ
दिल-ए-नादाँ, तुझे कई बार देखा,
इश्क़ हुआ तो तुझे परेशान कई बार देखा।
बड़ी तकलीफ़ में गुज़री है ज़िंदगी मेरी,
उसकी ज़ुल्फ़ों के साए में सुकून कई बार देखा।
ठहरा-ठहरा-सा था वक़्त मेरा भी,
उसके आने से जीवन में बहार कई बार देखा।
पूछते हैं मेरा पता वे गैरों से हमेशा,
मैंने उनकी आँखों में इंतज़ार कई बार देखा।
होती नहीं हैं उनसे रोज़-रोज़ बातें,
फ़ोन को ख़ामोश और बेज़ार कई बार देखा।
जिसकी बीमारी, वही जानता है अपना हाल,
दादी को नींबू-मिर्च उतारते कई बार देखा।
रहते हैं सामने दिलबर के तो नज़रें फेर लेते हैं,
झुकी निगाहों से मुस्कुराते कई बार देखा।
परवाह न कर ऐ राज, ज़माने की बातों की,
अज़ीज़ दोस्तों को भी जलते कई बार देखा।
और अंत में कविता
प्रेम मनुष्य को भीतर से बदल देता है। वह उसे संवेदनशील बनाता है, धैर्य सिखाता है और लोगों की असली पहचान भी करा देता है। अंततः प्रेम का सबसे बड़ा सत्य यही है कि जो उसे जीता है, वही उसकी गहराई को समझ पाता है।
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-------राजकपूर राजपूत
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