मोह, प्रेम और जीवन का सत्य | जीवन-दर्शन पर हिंदी कविता moh maya hindi-kavita

मोह, प्रेम और जीवन का सत्य | जीवन-दर्शन पर हिंदी कविता moh maya hindi-kavita


मनुष्य संसार में बहुत कुछ अपना मान लेता है—धन, प्रतिष्ठा, शक्ति और संबंध। लेकिन समय धीरे-धीरे यह सिखाता है कि इनमें से कुछ भी स्थायी नहीं है। जो स्थायी है, वह है कर्म, प्रेम और मानवीय संवेदना। प्रस्तुत कविता जीवन की नश्वरता, मोह के बंधन और सच्चे प्रेम की महत्ता पर एक चिंतन है। पढ़िए इस पर कविता हिन्दी 👇 

मोह माया पर कविता

ये दुनिया में सब मोह माया है
कुछ नहीं तू मिट्टी की काया है

इस क़दर तू गूरूर मत कर
एक दिन मिट्टी में ही समाया है

जो ठोक रहे थे जांघ निशदिन
वक़्त ने सबको थप्पड़ लगाया है

बुरे वक्त भी कहाॅ॑ ठहर पाएगा
कभी धूप तो कभी छाया है

प्रभु ने दिया सब कुछ कर्म कर
तेरे दिल में आलस क्यों आया है

कहाॅ॑ से तु आया है कहाॅ॑ तुझे जाना है
प्रेम के सिवा दुनिया में क्या पाया है

तोड़ दे सारे भ्रम जगत का ज्ञान पाएगा
बांट लो ये राज़ तू क्यों शरमाया है !!!

मोह से जकड़ा हुआ आदमी 
अपने ही प्रिय को जकड़ा हुआ आदमी 

प्रेम होता तो नदियों की धाराएं नहीं मोड़ती 
काट कर पहाड़ कर, निहारता हुआ आदमी 

अब प्रेम, न्याय के भूखे नहीं है 
सुविधाओं में जीता हुआ आदमी !!!

"प्रेम होता, तो स्वार्थ में प्रकृति का संतुलन न बिगड़ता; नदियाँ अपनी धारा में बहतीं और पहाड़ अपनी गरिमा में खड़े रहते।"

और अंत में कविता 

मोह हमें बाँधता है, जबकि प्रेम हमें व्यापक बनाता है। धन, पद और सुविधा जीवन को सरल बना सकते हैं, लेकिन केवल प्रेम, करुणा और कर्म ही जीवन को सार्थक बनाते हैं।
---राजकपूर राजपूत''राज''
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