रिश्तों और जीवन के निर्णय
जीवन और रिश्तों में सबसे कठिन चीज़ होती है—सही निर्णय लेना। कई बार हम साथ चल सकते हैं, लेकिन परिस्थितियाँ और असमंजस हमें अलग कर देते हैं। कई बार हमारे निर्णय रिश्तों का भविष्य तय कर देते हैं । अजीब बात है कि हम ही बनाते हैं और हम ही तोड़ते हैं । समझौता भी एक नियम के साथ चलता है ।
यह हिंदी कविता “समझौता और सफ़र” रिश्तों में अधूरेपन और जीवन के उन मोड़ों को दर्शाती है, जहाँ निर्णय लेना सबसे मुश्किल हो जाता है।
💔 समझौता और सफ़र
समझौता हम कर सकते थे,
साथ-साथ हम चल सकते थे।
चाहे आ जाते लाख तूफ़ान,
हम दोनों साथ लड़ सकते थे।
मेरा सफ़र कभी तन्हा न होता,
ख़्वाहिश थी—तुम आ सकते थे।
अगर मैं वादे पर खरा न उतरता,
तुम्हारी मर्ज़ी—रिश्ता तोड़ सकते थे।
मैंने चाहा है तुम्हें इस क़दर,
तेरे लिए हर समझौता कर सकते थे...!!!
🌫️ दिशाओं का द्वंद्व
सफ़र कितना आसान होता,
यदि चलते वक्त
दसों दिशाएँ न मिलतीं।
मैं चलता जाता
निरंतर
मंज़िल की ओर—
लेकिन दिशाओं ने
असमंजस में डाला।
मैं रुका—
इसलिए नहीं कि थक गया था,
बल्कि इसलिए कि
चुनाव कठिन था।
मेरे सफ़र की दिशा
यहीं कहीं भटक गई—
जैसे कठिनाई सफ़र में नहीं,
निर्णय में थी...!!!
समझौता पर टिका
ऊंच नीच दिखा
और रिश्ता टूट गया !!!
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