तुम्हारी खुशी हिंदी कविता Ghazal love hindi poetry

Ghazal love hindi 

 तुम भी तो यही चाहते थे

इसलिए मुझसे दूर जाते थे

भेद नहीं खोलते कभी अपनो का

मगर तुम दुश्मनों से बतियाते थे

मुझसे तेरी बातें ग़ैर ज़रूरी थी

इसलिए व्यवहार निभाते थे

प्यार नहीं दिखा कभी तेरी आंखों में

मेरा दर्द सुन के हॅंस जाते थे

नादान था इसलिए तुझे चाहा था

अब हम भी तुम्हें समझ जाते हैं !!!

Ghazal love hindi

तुम्हें तोड़ देनी चाहिए

तुम्हें छोड़ देनी चाहिए

उन नैतिकताओं को

जिनके पालन से

लोग तुम्हें कमजोर समझते हैं !!!

जहां तेरी खुशी थी

वहीं तुम्हें जाना था 

तुम भटकों मत

नव जीवन तुम्हें पाना था 

लोगों की बातों पे यकीं न कर

अगर सुनते हो तो अपनी मर्जी से चलाकर

एक दीया बुझा तो दूसरा जलाया कर !!!


उजाला थका रहा था 

अंधेरा लौट रहा था 

दिन भर का थका आदमी 

मानों घर लौट रहा था 

अपने जद्दोजहद से 

थकान मिटाने कोई बुला रहा था !!!


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