जीवन, सत्य और सहनशीलता हिन्दी कविता jeevan satya-aur sahanshilta kavita

जीवन, सत्य और सहनशीलता हिन्दी कविता jeevan-satya-aur-sahanshilta-kavita 

जीवन में परिस्थितियाँ हमेशा हमारे अनुसार नहीं होतीं। कभी स्वास्थ्य साथ नहीं देता, कभी सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ती है, और कभी संघर्षों के बीच भी आगे बढ़ते रहना पड़ता है। पढ़िए इस पर कविता हिन्दी 👇 

सत्य पर कविता


सब मौसम अच्छे होते हैं
केवल स्वास्थ्य खराब होते हैं
तब लगता है ये दिन खराब है
कुछ ना कहो मेरा दिमाग खराब है !!!

चाहता तो मैं भी बच सकता था 
मैं भी हंस सकता था 
कह सकता था 
तुम अच्छे हो 

इतना ही काफी है 
उसके खुश होने के लिए 
जो आदि हो चुके हैं 
गला रेतने का 
मैंने कह दिया 
तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए 

अब वो दुश्मन हो गया 
उसके विचार में 
पिछड़ा हो गया 

लोगों ने ऐसे लोगों का अनदेखा किया 
हंसकर सलाम किया 

बदले में गला रेतने वाले उसे फालो किया 
इसलिए नहीं कि उसके विचार अच्छे हैं 
बल्कि इसलिए उसका विरोध नहीं करते हैं !!!

नदी पर कविता

जिंदा तो रहना चाहिए था उसे 
जैसे पेड़ जीते हैं 
अपनों को कटते हुए 
और देखते हुए 
जैसी नदी बहती है 
खुब बहती है 
लेकिन नहीं मिलता उसे 
साफ पानी 
जब भी गई 
शहरों में 
आ कर मिल गई नाली 
गांवों में एनीकट 
राह रोक ली 
फिर भी बहे 
जहां तक सहे 
एक निशान ज़रूर छोड़ी 
गर्मियों में जरूर दिखता है 
एक सुखा नाला 
जो बरसात में जीवित होगी 
नदी की तरह !!!!!
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