फिसल ना जाए किसी पर
नज़र रखना अपने दिल पर

भटक रहा है देखो दर-बदर
भौंरा बैठ ना जाए किसी फूल पर

बंद हो गई जो फूल की पंखुड़ियाॅ॑
बहुत पछताओगे अपनी भूल पर

बैचैनी बढ़ जाएगी चैन नहीं मिलेगा
हर वक्त जीना पड़ेगा इसी शूल पर
---राजकपूर राजपूत''राज''