काश तुम होते मेरे पास | प्रेम, विरह और जीवन के स्थायित्व पर हिंदी कविता virah aur prem hindi-kavita
प्रस्तावना
कुछ रिश्ते केवल साथ रहने से नहीं, बल्कि जीवन को अर्थ देने से बनते हैं। प्रिय की अनुपस्थिति केवल एक व्यक्ति की कमी नहीं होती, बल्कि वह मन के भीतर एक ऐसा रिक्त स्थान छोड़ जाती है जिसे कोई और भर नहीं सकता। यह कविता उसी प्रतीक्षा, अधूरेपन और उस प्रेम की बात करती है, जो जीवन को स्थिरता और पूर्णता का अनुभव कराता है।
काश तुम होते मेरे पास
काश तुम भी होते मेरे साथ,
तो किसी और सहारे की ज़रूरत न होती।
काश तुम मेरे पास होते,
तो यह उदासी
मुझे यूँ घेर न पाती।
काश तुम
मेरे दिल की बात समझ पाते,
तो मुझे
अपने अकेलेपन का परिचय
बार-बार न देना पड़ता।
काश तुम
मेरे सफ़र में साथ चलते,
तो रास्ते
इतने बोझिल न लगते।
हर मोड़ पर
तुम्हारा हाथ होता,
तो हर कठिनाई भी
आसान लगती।
काश तुम भी
प्रेम में होते,
तो मुझे
प्रेम समझाने की आवश्यकता न पड़ती।
काश तुम
मेरी आँखों में उतरकर पढ़ पाते,
तो शब्दों की जगह
मौन ही सब कुछ कह देता।
काश तुम
सवाल कम करते,
और मेरे हृदय को
थोड़ा अधिक देखते।
शायद तब
तुम्हें भी
मुझसे मोहब्बत हो जाती।
अगर तुम साथ होते
काश तुम
मेरे पास होते,
तो हम मिलकर
इस दुनिया को देखते,
जो प्रेम के अभाव में
धीरे-धीरे
अपने ही भीतर भटकती जा रही है।
हम लोगों को बताते
कि प्रेम
कमज़ोरी नहीं,
बल्कि जीवन को
स्थिरता देने वाली शक्ति है।
हम उदाहरण बनते,
और अपने व्यवहार से
यह समझाते
कि साथ निभाना
किसी वादे से बड़ा होता है।
स्थायित्व
स्थायित्व क्या है?
शायद वही—
जिसके केंद्र में रहकर
मन शांत हो जाए।
जहाँ से
जीवन के सारे कार्य
संतुलित होने लगें।
जहाँ प्रेम
क्षणिक आकर्षण नहीं,
बल्कि
जीवन का आधार बन जाए।
जहाँ विश्वास
डर से बड़ा हो,
और अपनापन
स्वार्थ से।
काश...
तुम मेरे पास होते,
तो शायद
हम दोनों मिलकर
प्रेम का यही अर्थ
जीकर दिखा पाते।
और अंत में कविता
प्रेम केवल किसी का हाथ थाम लेना नहीं, बल्कि उसके साथ जीवन की दिशा और स्थिरता पाना भी है। जब दो लोग एक-दूसरे को समझने लगते हैं, तब शब्दों की आवश्यकता कम और अनुभूतियों का महत्व अधिक हो जाता है।

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