प्रेम का अंकुर | सच्चे प्रेम और आत्मिक जुड़ाव पर हिंदी कविता prem-ka-ankur-hindi-kavita

प्रेम का अंकुर | सच्चे प्रेम और आत्मिक जुड़ाव पर हिंदी कविता prem-ka-ankur-hindi-kavita

यह कविता प्रेम की उस शक्ति को व्यक्त करती है, जो जीवन की उलझनों, कृत्रिम तर्कों और मानसिक थकान के बीच भी मनुष्य को सरलता, स्थिरता और आत्मिक संतोष प्रदान करती है। प्रेम केवल एक भावना नहीं, बल्कि वह अनुभव है जो व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है और जीवन को नया अर्थ देता है । पढ़िए इस पर कविता हिन्दी 👇 

भावनात्मक कविता

मुझे सितम मिले लाख मगर,
इश्क़ मेरे लिए फंदा नहीं था।
अब जोड़-तोड़ की ज़िंदगी है,
मेरे लिए रिश्ता चंदा नहीं था।
दिल खोल दिया उसने अपना,
बदले में कुछ लेने का धंधा नहीं था।
जायज़ कहते रहे सब कुछ सियासत में,
मतलब समझा—कोई अंधा नहीं था।

प्रेम का अंकुर कविता 

प्रेम ही था
जब तुम आए,
मैंने जीवन की सारी असहजता को
धीरे-धीरे दूर होते पाया।
तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा रचे
उलझे और थकाने वाले शब्दों से
स्वयं को मुक्त पाया।
उच्छृंखलता के शोर को छोड़कर
मर्यादा की शांति में लौट आया।
तुममें ठहरना चाहा,
तुममें स्थिर होना चाहा।
मुझे लगा,
मेरे भीतर छिपा प्रेम का बीज
अंकुरित हो रहा है।
मैंने उसे
स्मृतियों की मिट्टी में सींचा,
विश्वास की धूप दी,
और संभालकर रखना सीखा।
अब वह केवल एक भावना नहीं,
मेरे अस्तित्व का हिस्सा है।
प्रेम ने मुझे सिखाया कि
हर रिश्ते का मूल्य
लेन-देन से नहीं होता,
कुछ संबंध ऐसे भी होते हैं
जो केवल अपनापन देकर
मन को समृद्ध कर जाते हैं।

और अंत में कविता 

यह कविता प्रेम को स्वार्थ, राजनीति और जोड़-तोड़ से अलग एक शुद्ध भाव के रूप में प्रस्तुत करती है। कवि के लिए प्रेम कोई बंधन नहीं, बल्कि आत्मिक विकास और आंतरिक शांति का माध्यम है। प्रेम जीवन की जटिलताओं को सरल बनाता है और व्यक्ति को अपने वास्तविक स्वरूप से जोड़ता है।
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---राजकपूर राजपूत''राज''

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