ख्वाहिशें | एकतरफा प्यार और अधूरी मोहब्बत पर हिंदी कविता khwahish poem hindi

एकतरफा प्यार और अधूरी मोहब्बत 


ख्वाहिशें इंसान को जिंदा भी रखती हैं और कई बार अंदर से तोड़ भी देती हैं। जब प्यार सच्चा हो लेकिन सामने वाला उसे समझ न पाए, तब दिल में एक खालीपन रह जाता है।
यह हिंदी कविता “ख्वाहिशें” उसी अधूरे प्रेम और आत्मसम्मान की कहानी कहती है, जहाँ भावनाएँ सच्ची हैं, लेकिन रिश्ता अधूरा रह जाता है।

💔 ख्वाहिशें कविता 

कुछ ख्वाहिशों की वजह से
जिंदा रहा हूँ मैं,
तू खुश रहे सदा—
दिल से दुआ करता रहा हूँ मैं।
तुमने सोचा नहीं था
कि प्यार इतना कठिन है,
तुझसे प्यार के बदले
प्यार कहाँ माँग रहा हूँ मैं।
दूरी तुमने चुनी—
मुझे मंज़ूर हो गया,
कि अब अलग रहना है।
निभा जितना साथ,
उतना निभा रहा हूँ मैं...!!!

ख्वाहिश थी
तेरे साथ रहूँ,
तू कहे तो हँसू,
तू कहे तो रोऊँ।
मगर तेरी ख्वाहिश
बस समय काटना था,
इसलिए दूरी चुनी—
भला क्यों मैं टाइम पास बनूँ...!!!

ख्वाहिशें

जिंदा भी रखती हैं,
और मार भी देती हैं।
अधूरी ख्वाहिश
कब तक साथ देती है,
जब सफ़र में
तू ही साथ नहीं देती...!!!

और क्या चाहिए 
तुने सफ़र में 
साथ छुड़ाया 
हाथ छुड़ाया 
अब तुम खुश हो 
मुझे और क्या चाहिए!!!

यह हिंदी कविता एकतरफा प्रेम और अधूरी ख्वाहिशों की पीड़ा को दर्शाती है। इसमें बताया गया है कि प्रेम सच्चा होने के बावजूद भी हर बार स्वीकार नहीं होता, और कई बार आत्मसम्मान के लिए दूरी बनाना जरूरी हो जाता है।

👉 अगर यह हिंदी कविता आपके दिल को छू जाए, तो इसे शेयर जरूर करें।


---राजकपूर राजपूत''राज''

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