क्षणिक नहीं होता प्यार | सच्चे प्रेम की गहराई पर हिंदी कविता sachcha prem hindi-kavita

क्षणिक नहीं होता प्यार | सच्चे प्रेम की गहराई पर हिंदी कविता sachcha prem hindi-kavita


सच्चा प्रेम समय के साथ समाप्त नहीं होता। वह किसी क्षणिक आकर्षण या भावनात्मक आवेग का नाम नहीं, बल्कि स्मृति, विश्वास और समर्पण की ऐसी अनुभूति है जो मन की गहराइयों में लंबे समय तक जीवित रहती है। यह कविता प्रेम की उसी स्थायी और गहन प्रकृति को शब्द देती है।

प्रेम पर कविता


क्षणिक नहीं होता प्यार,
समझो इसका सार।
यह ज्वार-भाटे की तरह
हर पल बदलने वाला भाव नहीं।
यह अपनी चाहत का
शोर नहीं मचाता,
अपने प्रेम का
प्रदर्शन नहीं करता।
यह तो
मन की गहराइयों में
शांत होकर बहता है।
प्रेम
अथाह सागर की तरह होता है,
जिसकी गहराइयों में
शीतलता बसती है,
जहाँ हर कोई
उतर नहीं पाता,
और जो उतर जाए,
वह स्वयं को
पहले जैसा नहीं पाता !!!

प्रेम और स्मृति

क्षणिक नहीं होता है प्यार 
समझों इसका सार 
एक बार अंकित हो जाने के बाद 
स्मृति में छप जाती है तस्वीर 
जिसके इर्द-गिर्द घूमता है संसार 
क्षणिक नहीं होता है प्यार 

वो देख लेता है छवि 
पागल, दीवाना सा कवि 
पेड़ों के झुरमुटों में,
बादलों की ओट में,
साँझ की धूप में,
बरसती बारिश में,
और चाँदनी रात की
शांत उजास में।
निहारता है हर पल बार-बार 
क्षणिक नहीं होता है प्यार । 

यह समय के साथ
रूप बदल सकता है,
पर समाप्त नहीं होता।
यह स्मृतियों में,
विश्वास में,
और आत्मा की गहराइयों में
एक शांत दीपक की तरह
जलता रहता है। !!!!

और अंत में कविता 

प्रेम का मूल्य उसके प्रदर्शन में नहीं, बल्कि उसकी स्थिरता में है। जो प्रेम समय, दूरी और परिस्थितियों के बाद भी मन में सम्मान, अपनापन और स्मृति के रूप में जीवित रहे, वही सच्चे प्रेम का स्वरूप है।
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---राजकपूर राजपूत''राज''

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