दिल में क्या है | एकतरफ़ा प्रेम और अनकहे एहसासों पर हिंदी ग़ज़ल

दिल में क्या है | एकतरफ़ा प्रेम और अनकहे एहसासों पर हिंदी ग़ज़ल

प्रेम में सबसे कठिन क्षण वह होता है जब शब्द अधूरे रह जाते हैं और निर्णय एक पक्ष से हो जाते हैं। यह कविता उसी मौन, शिकायत, प्रतीक्षा और अनकहे प्रेम की अभिव्यक्ति है ।

सच्चे प्रेम में प्रश्नों से अधिक संवाद और निर्णयों से अधिक समझ की आवश्यकता होती है। जब कोई बिना सुने दूर चला जाता है, तो सबसे अधिक पीड़ा उसी बात की होती है कि प्रेम को अपनी बात कहने का अवसर भी नहीं मिला।

एकतरफ़ा प्रेम पर हिंदी ग़ज़ल

मैं कैसे कहूँ, मेरे दिल में तेरे लिए क्या है,

तूने हाथ छुड़ाया, बता तेरे दिल में क्या है।

तुम कहते हो मेरा इश्क़ अभी नादान है,

किताबों में दबे गुलाब की पंखुड़ियों का अर्थ क्या है?

बेपरवाह सही, सबसे मिलते-जुलते हो तुम,

फिर मुझे देखकर नज़रों का झुक जाना क्या है?

दर्द छिपता नहीं, नज़रें सब बयाँ कर देती हैं,

यूँ भीड़ में हँसकर दिल को बहलाना क्या है?

तुमसे ही मेरी ज़िंदगी में रौनक और बहार है,

तेरे सिवा इस जीवन में आखिर रखा क्या है?

हँसकर भी कह सकते थे तुम अपने दिल की बात,

हर बार नाराज़ लहजा—अगर प्रेम नहीं, तो क्या है?

तुम्हारी शिकायतें और आरोप कभी कम नहीं हुए,

मैं तेरा ही रहा—यह मेरी सज़ा नहीं तो क्या है?

यदि बिना मेरी बात सुने ही फ़ैसला कर लिया,

तो यह एकतरफ़ा निर्णय नहीं, तो क्या है?


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