इतना तो ध्यान रहे | जीवन, ईमान और आत्मसम्मान पर हिंदी कविता Ghazal Hindi Inspirational

इतना तो ध्यान रहे | जीवन, ईमान और आत्मसम्मान पर हिंदी कविता Ghazal Hindi Inspirational


जीवन में सफलता जितनी आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है अपना चरित्र, ईमान और आत्मसम्मान बचाए रखना। समय के साथ बदलना स्वाभाविक है, लेकिन अपने मूल्यों से दूर हो जाना उचित नहीं। प्रस्तुत कविता जीवन को सजगता, मानवीयता और आत्मपहचान के साथ जीने का संदेश देती है।

इतना तो ध्यान रहे

इतना तो ध्यान रहे,
खुद की पहचान रहे।
कुछ बात अलग होगी तुममें,
अगर तुम सच्चे इंसान रहे।
बदल जाओ वक़्त के साथ,
मगर दिल में ईमान रहे।
नफ़रत कभी न बसने पाए,
सबके लिए सम्मान रहे।
निराशा चाहे लाख मिले,
दिल हमेशा जवान रहे।
मुश्किल राहों में भी अपने
सपनों का आसमान रहे।

इतना तो ज्ञान रहे


इतना तो ज्ञान रहे,
हर पल सावधान रहे।
लोग बहलाते भी हैं अक्सर,
इसका भी ध्यान रहे।
झुके-झुके से चलने वाले,
कई बार खुद से अनजान रहे।
सफलता जब भी मिले तुम्हें,
दिल में विनम्र अरमान रहे।
मतलबी इस ज़माने में भी,
मानवता का सम्मान रहे।
रिश्ते केवल स्वार्थ से नहीं,
विश्वास से महान रहे।
चलो इस तरह कि पीछे मुड़कर
अपने कर्मों पर अभिमान रहे।

और अंत में कविता 

समय बदलता है, परिस्थितियाँ बदलती हैं, लेकिन मनुष्य का चरित्र ही उसकी सबसे बड़ी पहचान होता है। यदि ईमान, सम्मान और सजगता जीवन में बनी रहे, तो हर सफलता सार्थक बन जाती है।
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---राजकपूर राजपूत''राज''
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