विचार, समय और जीवन का सच कविता
मनुष्य न तो पूर्णतः अच्छा होता है और न पूर्णतः बुरा। वह अपने विचारों, अनुभवों और परिस्थितियों का मिश्रण होता है। कभी प्रेम जीवन को दिशा देता है, तो कभी सफलता की अंधी दौड़ इंसान को स्वयं से दूर कर देती है। जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल सफलता नहीं, बल्कि अपने मूल्यों, संवेदनाओं और मानवीय गुणों को बचाए रखना है। प्रेम, विश्वास, दया और ईमानदारी के बिना प्राप्त उपलब्धियाँ अधूरी रह जाती हैं।
यह कविता जीवन, समय, प्रेम, विश्वास और आधुनिक समाज की मानसिकता पर एक गहन चिंतन प्रस्तुत करती है।
मैं महान नहीं हूँ कविता
ऐसा नहीं कि मैं महान हूँ
सबकी नजरों में समान हूँ
कोई बुरे हैं कोई अच्छे हैं
मैं सबके लिए क्यों परेशान हूँ
विचारों का पुतला है आदमी
फिर भी खुद से अनजान हूॅं
रूक जा ठहर जा ऐ ! वक्त
तुझे साथ पाके मैं धनवान हूॅं
जीने का मजा उस वक्त नहीं आया
जब तू नहीं आया
उन विचारों से सहमति नहीं बनी
जो तुझको नहीं भाया
ये प्रेम, दया, ईमानदारी
ऐसे व्यक्तित्व क्यों तुने नहीं लाया
सफलता का मापदंड सबके अनुसार नहीं होती
गिरकर खुद को कहीं छोड़ आया !!!!
डर का माहौल कविता
माहौल डर का
हर घर का
खिड़कियों से छाकना
सीमित संबंध है हर घर का
उसमें हौसला नहीं, विश्वास नहीं
अजीब मन में, अजीब डर का
सिखाया है तथाकथित बुद्धिजीवियों ने
इश्क और जंग में बराबर है विचार का
सफलता ही मायने हैं गिरने के बाद भी
तो क्या मजा है ऐसे संसार का !!!!!
-राजकपूर राजपूत "राज "
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