कविता: यादों की अंगड़ाई yaadon-ki-angdaai-poetry

कभी-कभी मौसम की हल्की अंगड़ाई और ठंडी हवा हमारे दिल की गहराइयों को छू जाती है।
यह कविता उस अजीब सा अहसास, यादों की ताजगी और तन्हाई में प्रेम के भाव को व्यक्त करती है।

✨ कविता: यादों की अंगड़ाई ✨

मौसम में आज अजीब सी अंगड़ाई है,
मेरे तन्हा दिल को फिर तेरी याद आई है। 💭
तुम मिलो तो खुल कर मिलो, दिल के तसल्ली तक,
यूं आए और चले गए, मेरे सीने में बेचैनी छाई है।
तुम हंसे तो अच्छा लगा,
जैसे जलते बदन को ठंडक लगी। ❄️
ठंडी हवा सरसरा के बही,
दिन भर ताजगी छाई है।
सहसा तेरी याद आई,
बदन ने अंगड़ाई ली।
भूला था मैं कबसे तुझको,
बेवजह छोड़कर चले गए मुझको।
कभी-कभी लगता है तुम भी मुझे याद करते हो,
फिर लगता है कि क्यों याद करते हो।
ये ख्याब सजाना छोड़ दिया हूँ कबसे,
मेरा प्यार एकतरफा है, जाना हूँ तबसे।
तुम नहीं हो सकते कभी मेरा,
जाना हूँ आसानी से छोड़ कर जाना तेरा। 💔
धरती जब अंगड़ाई लेगी,
नदी बहेगी,
हवा बहेगी,
पर्वत खड़ा देखता रहेगा। ⛰️
छोड़ साथ, नदी कहां चली!

✨ आहट ✨

तुम्हारी यादों की आहट,
सन्नाटे में गूंजती है।
हर झोंके में तुम्हारी खुशबू,
हर धड़कन में तुम्हारी याद। 🌿
दिन ढलते हैं,
रातें बढ़ती हैं,
मगर दिल में तेरी मौजूदगी
हर पल ताजगी भरती है।
इस एकतरफा प्यार में,
सुकून भी है,
बेचैनी भी,
लेकिन यही मेरी असली ज़िंदगी है।
यादें ही मेरी साथी हैं,
जो मुझे तन्हाई में गले लगाती हैं।
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🌟 और अंत में कविता 🌟

यह कविता यह बताती है कि प्रकृति और मौसम भी हमारी भावनाओं से जुड़ते हैं।
तन्हाई, यादें और एकतरफा प्यार—ये सभी हमारे दिल की गहराइयों को छूते हैं।
सच्चा प्रेम केवल मिलने या पास होने में नहीं,
बल्कि यादों और अनुभवों में भी जीवित रहता है। 🌸
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