पसंद अपनी अपनी कविता हिन्दी
like your own poem
दिखावा वहीं करते हैं
जो तारीफ पे जीते हैं
पसंद अपनी अपनी
दूसरों की नजरों से जीते हैं !!
लोग जो ब्यूटी पार्लर जाते हैं
खुद को दिखावा के लिए तैयार कर लेते हैं
और अहंकार में आ जाते हैं
वह किसी से कम नहीं है
सुंदरता के हिसाब से तो लेप लगा लेते हैं
लेकिन मन के अंदर घमंड चढ़ा लेते हैं
जीते हैं इसी भ्रम में
पसंद अपनी अपनी !!!
दवा कड़वी ही सही
मगर हर बीमारी का इलाज है
और लोग पसंद नहीं करते कड़वी चीजें
क्या करें पसंद अपनी अपनी !!
पसंद हमें तू बहुत था
मगर तुम्हारी पसंद कुछ और थी
लोग अपने दिल से हारते हैं
क्या करें पसंद अपनी अपनी !!!
पसंद थी हमें तुम्हें ताकना
बादलों की ओट से चांद को झांकना
हम जमीं पे रहे तू आसमान पर
मिलती नहीं मोहब्बत ऐसी उम्मीद पर !!!
पसंद अपनी-अपनी
गिर जाना, फिर उठ जाना
निर्लज्जता को महान साबित कर जाना
एक हुनर है आजकल
षड्यंत्र भी सफलता दिलाए तो
नैतिकता का मापदंड है
देखा-देखी में सबका अपनाना !!!
पसंद अपनी-अपनी
दुनिया अपनी-अपनी
तू उस रास्ते मैं इस रास्ते
बात अपनी-अपनी
मेल न होगा कभी
सोच अपनी-अपनी
तेरे इरादे छिपे हैं
मैं जानता हूं
समझ अपनी-अपनी
सत्रह बार माफ़ किया
अहसान नहीं समझें
धोखेबाजी अपनी-अपनी
चौहान की क्षमा कोई -कोई
समझ अपनी-अपनी!!!
इन्हें भी पढ़ें 👉 सुन्दरता और अहसास

0 टिप्पणियाँ